रांची : झारखंड पूरे देश में नशे के कारोबार का कॉरिडोर बना हुआ है। झारखंड से होकर ही अफीम व गांजा देश के दूसरे हिस्सों, खासकर पंजाब, बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली-मुंबई तक पहुंच रहा है। राज्य में अब तक दर्जनभर से अधिक स्थानों से बरामद गांजा का ओडिशा कनेक्शन मिल चुका है। अफीम की खेती और इसकी तस्करी को लेकर झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र हमेशा से बदनाम रहे हैं। रांची, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी, चतरा, लातेहार जिले में सबसे अधिक अफीम की खेती के सबूत मिलते रहे हैं।
झारखंड में अफीम के लिए खूंटी व चतरा सर्वाधिक बदनाम
राज्य में अफीम की खेती के लिए खूंटी व चतरा जिले सर्वाधिक बदनाम रहे हैं। इसके अलावा, रांची, लातेहार, सरायकेला-खरसावां व सिमडेगा जिले के कुछ क्षेत्रों में अफीम की खेती की जानकारी मिलती रही है। एनसीबी की टीम स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एकड़ की एकड़ फसल नष्ट करती रही है, लेकिन इस नेटवर्क को अब तक पूरी तरह तोडऩे में नाकाम रही है। हर बार यही जानकारी मिलती है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने से किसानों को अफीम की खेती में बढ़ावा मिलता है। फसल तैयार होने पर इसकी ऊंची कीमत भी मिलती है।
झारखंड में गांजा के बड़े खेप होते रहें हैं जब्त
केस 1 : 3 दिसम्बर 2021 को पुलिस टैंकर वाहन के केबिन से सटे प्रथम पार्टीशन में भूरे रंग के प्लास्टिक टेप में लिपटा 30 पैकेट गांजा बरामद किया था। इस टैंकर में कुल 150 किलोग्राम गांजा था जिसे पुलिस ने जब्त किया। वहीं टैंकर के मालिक, चालक एवं सहयोगी को गिरफ्तार किया गया।
केस 2 : 1 दिसम्बर 2021 को नामकुम थाना क्षेत्र के रामपुर के पास पुलिस की टीम ने ओड़िशा के नंबर की एक होंडा सिटी कार से करीब 86 किलो गांजा जब्त किया। जब्त सामान की बाजार में कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई। पुलिस की जांच को देख कार में सवार तीन आरोपी पीछे से आ रहे एसयूवी से भाग निकले थे।
केस 3 :16 नवंबर 2021 को पलामू जिले में पुलिस ने कुछ घरों में छापेमारी कर 38 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था। छापेमारी के दौरान इस धंधे में शामिल चार महिला और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया था।
केस 4: 8 नवंबर 2021 को पुलिस ने गांजा लदे ट्रक को जब्त किया था। इस ट्रक में कुल 174 किलोग्राम गांजा था।हालांकि ड्राइवर और तस्कर अंधेरे का लाभ उठाकर भागने में सफल रहा था। जब्त गांजे की कीमत 80 लाख रुपये से अधिक बताई गई थी।





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