
खूंटी : शहर के प्रतिष्ठित आदर्श विद्यालय,खूंटी को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश विगत 2 वर्षों से चल रही थी जिसका 16 फरवरी को पर्दाफाश हो गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुधांशु कुमार दत्त पर साजिश के तहत अनर्गल आरोप लगाकर उन्हें प्रधानाध्यापक पद से हटाने का प्रयास किया जा रहा था। विद्यालय के छात्रों एवं शिक्षकों की तत्परता से फिर एक बार विद्यालय एवं प्रधानाध्यापक की प्रतिष्ठा हनन होने से बच गई।

घटना 16 फरवरी की है । पूर्व निर्धारित षड्यंत्र के तहत विद्यालय में दोपहर को एक महिला विद्यालय प्रांगण में छात्रों को बहला फुसला रही थी और उन्हें कह रही थी कि दत्ता सर प्रधानाध्यापक को हटाना है एवं विद्यालय में अनुशासन बनाना है। महिला द्वारा छात्र- छात्राओं को प्रशिक्षण देते हुए से एक सादे कागज पर उनसे अपना नाम, पिता का नाम लिखने बोल रही थी। इससे सभी विद्यार्थी काफी भयभीत हो गए और ऑफिस आकर उन्होंने विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाओं को घटना की जानकारी दी । त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधानाध्यापक एवं सभी शिक्षकों ने षड्यंत्रकारी महिला को कार्यालय बुलाया एवं सादा कागज पर हस्ताक्षर कराने की बात का खुलाशा किया। ऐसा घृणित कार्य करने का कारण पूछे जाने पर वह महीला विद्यालय से चुपके से चली गई। उक्त महीला के बारे में जानकारी प्राप्त करने पर पता चला कि वह विद्यालय प्रबंध समिति की सदस्य सुहानी पूर्ती निकली जो कभी कभार राजनीति करने विद्यालय आ जाती है।

प्रधानाध्यापक सुधांशु दत्ता ने मामले पर संज्ञान लेकर कार्यालय आदेश निर्गत कर सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को इस तरह के असामाजिक तत्वों से सावधान रहने का की कड़ी हिदायत दी।

साथ हीं उन्होंने जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण रंजन , जिला शिक्षा पदाधिकारी अतुल कुमार चौबे, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी धीरेंद्र कुमार एवं क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर घटना की जानकारी देते हुए कहा कि सुहानी पूर्ति तो एक मोहरा है विभाग, षड्यंत्रकारी व् मास्टरमाइंड शख्स का पता कर सार्वजनिक करे।

गौरतलब है कि जुलाई 2020 में सुधांशु कुमार द्वारा आदर्श विद्यालय का प्रभार ग्रहण किया इसके बाद उन्हें पद से हटाने के लिए लगातार गंदी राजनीति करने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें इस बार छात्रों का उपयोग किया गया।

प्रधानाध्यापक ने कहा है की विगत २८ वर्षों की सेवा में अब तक उनके ऊपर कोई आरोप नहीं लगा है , वे बिल्कुल बेदाग हैं। उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास एक घृणित कार्य है जिसका सभी शिक्षक घोर निंदा करते हैं। प्रधानाध्यापक ने आशंका व्यक्त की है की शाजिशकर्ता पुनः कोई नै शाजिश कर सकता ह। ऐसे में वे अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं ।






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