सिल्ली : देश की संस्कृति व लोक परमराओं के संरक्षण के उद्देश्य से सिल्ली के बिंदीटांड़ में 7 से 9 मार्च तक तीन दिवसीय बंसत उत्सव गुरुवार को संपन्न हो गया। कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता के रंगीला नामक स्वयंसेवी संस्था के द्वारा किया गया । समापन कार्यक्रम मैं विधायक सुदेश कुमार महतो उनकी पत्नी नेहा महतो शामिल हुए ।
इस मौके पर विधायक सुदेश कुमार महतो ने कहा कि
भारतीय संस्कृति व सभ्यता को बचाने के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। इसे बचाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। देश में अभी भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपने जीवन निर्वाह के लिए जल, जंगल और जमीन पर निर्भर है। आम लोग इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हैं, क्योंकि यह उनके जीवन को प्रभावित करता है। हमारी संस्कृति में जल, जंगल और जमीन की पूजा की जाती है। हमने भारतीय संस्कृति और परंपरा की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित बनाए रखना है।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए शेखर भट्टाचार्य ने बताया कि कार्यक्रम के पहले दिन बंसत उत्सव की शुरुआत रंगीला परिचय कार्यक्रम से किया गया। साथ ही होलिका दहन भी किया गया। इस दौरान पुरुलिया से आये कलाकरों ने संथाली नृत्य की प्रस्तुति दी। दूसरे दिन बसंत बहार संगीत राग पर आधारित कार्यक्रम, आयोजित किया गया। तीसरे दिन चावल से पूजा करके खीर बनाकर नवान्न उत्सव मनाया। ढेंकी से चावल बनाकर, भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को बचाने का प्रयास को दर्शाया गया।
दिवेन्दु शेखर मुखोपाध्याय के निर्देशन में ‘हवा बदल’ नामक ड्रामा का मंचन किया गया। मुर्शिदाबाद से आये कलाकरों ने राय बेसे नृत्य, पैरोडी गीत, लोक संगीत, रविंद्र संगीत की प्रस्तुति दी गयी। कार्यक्रम के तीनों दिन जहां रंगीला के सदस्यों ने कार्यक्रम का भरपूर लुफ्त उठाया वहीं आसपास के ग्रामीणों का भी कार्यक्रम को सफल बनाने में काफी सहयोग रहा। इस मौके पर गूँज परिवार के संयोजक जयपाल सिंह, अध्यक्ष सुनील सिंह, संजय सिद्धार्थ, प्रमुख जितेंद्र बढ़ाइक, तान्या गुप्ता, उज्ज्वल मंडल, विश्वरूप सेन, शुभो चक्रवर्ती, देवाशीष फडीकार, रिंकू चक्रवर्ती, धीरज महतो समेत पश्चिम बंगाल के कोलकाता समेत कई जगहों के काफी संख्या में लोगो ने हिस्सा लिया।





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