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सत्कर्म की सत्य शिक्षा तो केवल परमात्मा सदाशिव भगवान ही देते हैं। विकारग्रस्त विश्व के अज्ञान अंधकार को मिटाकर शिव ही प्रकाशमय बनाते हैं।

रॉची : सत्कर्म की सत्य शिक्षा तो केवल परमात्मा सदाशिव भगवान ही देते हैं। विकारग्रस्त विश्व के अज्ञान अंधकार को मिटाकर शिव ही प्रकाशमय बनाते हैं। ये उद्गार ब्रह्माकुमारी संस्थान
राजयोग केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड में शिव अवतरण आध्यात्मिक रहस्य कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलन कर उद्घाटन करते हुए आई०आई०एम० रॉची निदेशक दीपक श्रीवास्तव
ने व्यक्त किये।

कार्यक्रम में बोलते हुए उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राहुल पुरवार (भा.प्र.से.) ने कहा ज्ञान सागर परमात्मा शिव से अमृत कलश प्राप्त करके अज्ञानता से ग्रस्त नर-नारियों को अमर पद दिलाने की ईश्वरीय सेवा करने के कारण भारत में शिव शक्तियों का गायन होता है।
आज इसी बात को समझने और धारण करने की आवश्यकता है कि भौतिकज्ञान के साथ-साथ
आध्यात्मिक ज्ञान को भी उचित स्थान दिया जाए।

कार्यक्रम में बोलते हुए रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी भवेशानन्द जी ने कहा नैतिक मूल्यों की समाज में आवश्यकता के साथ-साथ मनोयोग व बुद्धियोग भी व्यक्तिगत जीवन में जरूरी है। मनोयोग ईश्वर के साथ जोड़ने से ही मनुष्ट में दिव्य गुणों का उत्कर्ष होगा। मन में
विवेक उदय होकर आत्मा परमात्मा के सम्मुख होगी तथा श्रेष्ठ कर्म होने लगेंगे।
कार्यक्रम में धर्मेन्द्र दीक्षित, संयुक्त सचिव संस्कृति विभाग ने कहा आज सभी जीवन में दुःख व अशांति पैदा करने वाले काम क्रोध रूपी विकारों के विष पी रहे हैं। आत्म विस्मृति से पुनः आत्म स्मृति में मानवे को लाना ही शिव द्वारा उद्घोषित आध्यात्मिक क्रांति का लक्ष्य है व इसमें ही मानव की सर्व समस्याओं का समाधान है।

इस अवसर पर सुनील श्रीवास्तव साईं समिति के संयोजक सह राँची सिमेंट के एम०डी० ने कहा आध्यात्म का लक्ष्य तो आत्मा का कल्याण ही है और कल्याण का वाचक तो ‘शिव’ शब्द ही है। संकटमोचन महाकालेश्वर शिव ने मानवता के कल्याण के लिए हलाहल पान किया था।
कार्यक्रम में देवाशीष चक्रवर्ती, उप निदेशक, झारखंड एडस सोसाइटी ने कहा राजयोग से ही मानव मन की विकृतियों का शुद्धीकरण होता है.

उक्त आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा शिव का स्मृति चिह्न शिवलिंग के रूप में सर्वत्र सर्व धर्मावलम्बियों द्वारा मान्य है। शिव योगेश्वर हैं- शंकर योगमूर्ति
हैं। आज कलियुग की महारात्रि चल रही है। इस समय आत्मा को ज्ञान द्वारा जाग्रत करना ही जागरण है। इस जागरण से ही सच्ची सामाजिक क्रांति आयेगी और कलियुगी विश्व व्यवस्था परिवर्तित होकर दैवी निर्विकारी वास्तविक स्वराज्य की स्थापना होगी। आज सभी ओर से यह आवाज उठ रही है कि यह जगत के उद्धारक के प्रकट होने का और सृष्टि तथा मानवता के सर्व कल्याण सम्पादित होने का समय है। तमोगुणी जड़ता को भेदकर ज्ञान सूर्य शिव पिता परमात्मा
के अवतरण का यही यथार्थ समय है। तमोगुणी दुःखी व अशांत सृष्टि के परिवर्तन की भूमिका अब तैयार हो गयी है। यह ऐसा समय है जब हम शिव पिता परमात्मा का संदेश संसार की मनुष्यात्माओं को सुना सकेंगे।

विश्व का परिवर्तन कई प्रकार के मानवी कुकृत्यों व दैवी आपदाओं का मिला-जुला फल होगा जब सभी आत्माओं के वापिस जाने का समय आ जाता है तभी सुदुर देशवासी शिव युग चक्र को पलटाने के लिए सक्रिय हो उठते हैं। रूहों की करूण पुकार उन्हें आने के लिए बाध्य कर देती है। शिव की इस धरा पर ज्ञानगंगा बहाते हुए 87 वर्ष हो गये हैं व अनेकों के पाप मिटाते हुए एक अलौकिक शक्ति सेना उन्होंने तैयार कर दी है, जो आने वाले थोडे ही समय में सृष्टि का कायाकल्प कर देगी। अनेकानेक गणयमान्य नागरिकों ने मुक्त हस्त से शिव ध्वज से दिव्य वरदान प्राप्त किये। इनके अलावा कार्यक्रम में डा० प्रीति, रतन कुमार गुप्ता पूर्व आई०एस० एवं बिनोद नरायण, प्रोफेसर समाजशास्त्र विभाग अदि गणनान्य अतिथि उपस्थित हुए। शिवजन्मोत्सव के अवसर पर
अतिथियों के द्वारा केक भी काटा गया। कलाकारों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया तथा सभी अतिथियों को ईश्वरीय सौगात भेंट की गई।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
( आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग प्रशिक्षण केन्द्र)
चौधरी बगान, हरित भवन के सामने हरमू रोड, रॉची – 834001
मो० सं०- 09430142547, 8340645941 ई मेल ranchi@bkivv.org

Deepak Verma

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