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नया युग आध्यात्मिक युग होगा पवित्रता ही सुख शान्ति की जननी हैं ; प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने मनाया गीता जयन्ती समारोह

रांची: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बगान, हरमू रोड में गीता जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के आरंभ में सभी का स्वागत आत्म स्मृति का तिलक लगाकर किया गया। बाल कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया गया । “निराकार शिव आयें, गीता ज्ञान सुनाने” गीत पर नृत्य हुआ।

दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रान्तीय अध्यक्ष बसंत कुमार मित्तल ने कहा कि गीता शास्त्र वास्तव में चरित्र निर्माण का शास्त्र है। भगवान ने कहा चरित्र तो कमल पुष्प समान संसार में रहते हुए अनासक्त होकर किये गये श्रेष्ठ कर्मों से बनेगा न कि घर-बार छोड़ने, कर्म सन्यास क्रियायें करने से। कार्यक्रम में पंडित बालेश्वर नाथ पाठक ने कहा कि गीता में चरित्र निर्माण की शिक्षाओं का उल्लेख है। जैसे कि काम से ही क्रोध की उत्पति होती है जिससे बुद्धि का नाश होता है। वास्तव में
परमात्मा ने विकारों से ही युद्ध कराई थी न कि हिंसक युद्ध । स्वधर्म सुख देने वाला है परधर्म दुःख देने वाला है। अतः स्वधर्म में टिकना चरित्र निर्माण की प्रथम आधारशिला है। मनोबल प्राप्त करने के लिए परमात्मा ने योग सिखाया क्योंकि योग से ही पिछले विकर्म विनाश होते हैं।

कार्यक्रम में सुदर्शन पंडित ने कहा कि भगवतगीता पठन से शुद्ध संस्कार बनते हैं और कर्मों में कुशलता आती है। कार्यक्रम में पं० अशोक पांडेय ने कहा कि गीता का मूल संदेश यही है कि हम आत्मवादी बनें आत्मस्मृति में स्थित होकर परमात्मा के बनें। कार्यक्रम में आचार्य पुरुषोत्तम मिश्र ने कहा कि गीता के भगवान को जानना परमात्मा को जानना है।

प० रामविलास वैद्य ने कहा गीता सब शास्त्रों की पिता है जो हमें जीवन जीने की राह बताता है। कार्यक्रम में आचार्य कृष्ण जी भागवत वक्ता ने कहा कि भगवतगीता द्वारा उद्घाटित सत्य ज्ञान व राजयोग से देव पदों तथा स्वर्ग के पदों को सभी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे आत्म निश्चयी व्यक्ति को यह विश्वास करने में विलम्ब नहीं लगेगा कि भगवान पुनः हम मनुष्यों के मध्य उपस्थित होकर अपना वही गीता ज्ञान दे रहें हैं और पुनः पृथ्वी पर स्वर्ग के राज्य की स्थापना का पथ प्रशस्त कर रहे हैं।

मानव उत्थान सेवा संस्थान की साध्वी महात्मा अश्वनी ने कहा कि सर्वशास्त्रमई शिरोमणि गीता को ही विश्व का एक मात्र धर्मशास्त्र होना चाहिए। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा अब वही समय है जब पुनः गीता के भगवान अवतरित होकर प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा राजयोग सिखला रहे हैं जिससे नर से नारायण तथा मानवता सम्पूर्ण चरित्रवान बन जाती है। गीता सब शास्त्रों की माता है। गीता श्रीकृष्ण की भी माता है। ज्योति स्वरूप परमात्मा ही सर्व आत्माओं के परमपिता हैं। उन्हीं परमपिता ने हम सब आत्माओं रूपी वत्सों के कल्याण के लिए गीता ज्ञान दिया और वर्तमान धर्म ग्लानि के समय अब वे फिर से गीताज्ञान देकर हम सबको कृतार्थ कर रहे हैं और हमें चाहिए कि हम इसी बीच के समय में इस ईश्वरीय ज्ञान द्वारा अपने जीवन को सफल बना लें क्योंकि विश्व में विकट परिस्थितियाँ आने में अभी थोड़ा ही समय शेष है। उन्होंने कहा परमात्मा शिव भगवान ने यह स्पष्ट किया है कि नये कल्प में देवताओं का सतयुगी स्वराज्य आरंभ होने वाला है तथा पुराने कल्प में कलियुगी नारकीय राज्य समाप्त होने के मध्य एक छोटा सा मध्यांतर अथवा संगमयुग आता है, क्योंकि एक अभूतपूर्व विनाशलीला के पश्चात् ही देवताओं के सतयुगी स्वराज्य का शुभारंभ होता है इसलिए कलियुग की समाप्ति के वर्षों वाले संगम युग के वास्तविक विवरण नये कल्प में उपलब्ध नहीं होते। इसी संदर्भ में गीता में भगवान अपने अनन्य सखा और अतिप्रिय साथी सहयोगी अजुर्न से कहते हैं “मैं तुमको प्रायः लोप ज्ञान सुना रहा हूँ जिसको कोई नहीं जानता” ईश्वरीय महावाक्यों के अनुसार यह सृष्टि जगत की समग्र तत्व योजना तामसिक से सात्विक बन जाती है तब नयी सृष्टि के शुभारंभ में भारत के लोग ही देवता होते हैं।

सतयुगी भारत ही साकेतपुरी अथवा स्वर्गपुरी होता है जबकि आज का कलियुगी जगत ही रावणपुरी लंका या नर्कलोक समान है। देवताओं के अनेक शास्त्रों का तात्पर्य योग तथा ज्ञान की उन विधियों पद्धतियों से जिनसे विकारों रूपी असुरों की विशाल सेना पर विजय प्राप्त करना सम्भव बन जाता है। आज जब भौतिकवादी व पदार्थवादी दृष्टिकोणों के चिंतक व विचारक भविष्य के सम्बंध में अत्यंत निराशावादी बातें कर रहें हैं, तब ईश्वरीय कथनों से कठिन अग्निपरीक्षा के बाद एक सर्वथा सुखी सम्पन्न श्रेष्ठतर समाज के उदय का आशामय संदेश हमें मिलता है।

कार्यक्रम में अन्य लोगों में पं० नवीन कुमार पाण्डेय, पं० संजीव पाठक, पं० मिथिलेश कुमार मिश्र, पं० आशीष कुमार मिश्रा, पं० संतोष मिश्रा, डॉ निमय दास बनर्जी, पं० पवन कुमार मिश्रा, अरविन्द प्रसाद, स्वेता कुमारी साध्वी, रंजना सिन्हा, सुनील सिन्हा, दीपक वर्मा, प्रमोद कुमार शर्मा, पं० कमलकांत पांडेय, डॉ ए.के. श्रीवास्तव, राजीव रंजन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थें।

Deepak Verma

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