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बढ़ती जनसंख्या राष्ट्र के लिए खतरा – महंत सीताराम शरण

बोकारो : राष्ट्र बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक महन्त सीताराम शरण जी महाराज, चित्रकूट, बोकारो जिला के बेरमो जरीडीह के एक कार्यक्रम में कहा किबढ़ती जनसंख्या की विकरालता का सीधा प्रभाव प्रकृति पर पड़ता है जो जनसंख्या के आधिक्य से अपना संतुलन बैठाती है और फिर प्रारम्भ होता है। असंतुलित प्रकृति का क्रूरतम तांडव जिससे हमारा समस्त जैव मण्डल प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। इस बात की चेतावनी आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व माल्थस नामक अर्थशास्त्री ने अपने एक लेख में दी थी। इस लेख में माल्थस ने लिखा है कि यदि आत्मसंयम और कृत्रिम साधनों से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित नहीं किया गया तो प्रकृति अपने क्रूर हाथों से इसे नियंत्रित करने का प्रयास करेगी।

वायुमण्डल में ग्रीन हाउस गैसों की वृद्धि का कारण बढ़ती हुई जनसंख्या की निरंतर बढ़ रही आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ है। जब एक देश की जनसंख्या बढ़ती है तो वहाँ की आवश्यकताओं के अनुरूप उद्योगों की संख्या बढ़ जाती है। आवास समस्या के निराकरण के रूप में शहरों का फैलाव बढ़ जाता है जिससे वनों की अंधाधुंध कटाई होती है। दूर-दूर बस रहे शहरों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के बहाने वाहनों का प्रयोग बहुत अधिक बढ़ जाता है जिससे वायु प्रदूषण की समस्या भी उतनी ही अधिक बढ़ जाती है। इस तरह बढ़ती जनसंख्या हमारे पर्यावरण को तीन प्रमुख प्रकारों से प्रभावित करती है।

रांची से पधारी राष्ट्र बचाओ आंदोलन के महिला प्रदेश अध्यक्ष अंकिता ने कहा-राष्ट्र बचाओ आंदोलन पूरे देश मे एक नागरिक संहिता, एक धर्मस्थल संहिता, एक शिक्षा संहिता, एक जनसंख्या नियंत्रण संहिता, एक दंड संहिता, एक न्यायिक सुनीता एक नागरिक संहिता एक प्रशासनिक संहिता,एक चिकित्सा संहिता,एक मजदूर संहिता, आदि अभियानों को लेकर चल रही है।

उद्योगों की बढ़ती संख्या बढ़ती जनसंख्या का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण जो देखने को मिलता है वह है ‘शहरीकरण’। जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती जाती है, आवास की समस्या भी बढ़ती जाती है और परिणाम स्वरूप शहर अनियमित रूप से फैलने लगते हैं। इस प्रक्रिया में सर्वाधिक हानि वनों की होती है। अकेले भारत में ही प्रतिवर्ष 16 लाख हेक्टेयर वन उजड़ रहे हैं। यद्यपि सरकारी नीति के अनुसार देश में कुल भूभाग का 33 प्रतिशत भाग वन होना आवश्यक है लेकिन फिर भी कुल 21 प्रतिशत भाग ही वनों से आच्छादित है। राजस्थान में तो केवल 9 प्रतिशत भू-भाग पर ही वन बचे रह गये हैं।

वनों के कटने से जहाँ एक ओर वृक्षों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के लिये कार्बन डाईऑक्साइड का उपयोग कम हो जाता है वहीं दूसरी ओर जब वन कटते हैं तो पृथ्वी के भीतर कुछ कार्बन ऑक्सीकृत होकर वायु मण्डल में प्रवेश कर जाता है, जिससे वायुमण्डल में कार्बनडाईऑक्साइड की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है और वातावरण का ताप बढ़ जाता है। राष्ट्र बचाओ आंदोलन के प्रदेश कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा आज जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है उससे कहीं अधिक तेजी से स्वचालित वाहनों की संख्या बढ़ रही है। फलस्वरूप जो ऑक्सीजन जीवधारियों के प्रयोग में आनी चाहिए वह स्वचालित वाहनों द्वारा प्रयोग में लायी जा रही है और बदले में जीवधारियों को मिल रहा है इन वाहनों द्वारा वायुमण्डलों में छोड़ा गया जहरला धुँआ जो विभिन्न प्रकार की मानव व्याधियों को जन्म दे रहा है।

आज आवश्यकता है कि बढ़ती जनसंख्या पर कारगर रोक लगायी जाए ताकि वर्तमान एवं भविष्य में आने वाली मानव पीढ़ियों को स्वस्थ पर्यावरण में जीवन व्यतीत करने का अवसर मिल सके। बोकारो जिले में भी बहुत जल्द समिति की गठन की घोषणा की जाएगी।एवं बोकारो जिला में प्रदेश स्तर की कार्यक्रम बहुत जल्द घोषणा होगी जिसमें दिल्ली से श्री अश्विनी उपाध्याय जी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

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