रांची: राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिले में नक्सली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए संविदा पर 2500 सहायक पुलिस कर्मियों की 2017 में नियुक्ति की गई थी। इन सभी पुलिसकर्मियों को कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर बहाल की गई थी। उस समय की रघुवर सरकार ने संविदा पर बहाल सहायक पुलिस कर्मियों को आश्वासन दिया था कि आपकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।तीन साल के बाद सभी सहायक पुलिस कर्मियों को जिला पुलिस में तैनाती की जाएगी।
सहायक पुलिस कर्मियों की मानदेय दस हज़ार है। लेकिन इस मानदेय से सहायक पुलिस कर्मी काफी नाराज हैं। अपनी मांगों को लेकर मोरहाबादी मैदान में अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हुए हैं। सहायक पुलिस कर्मियों की धरना प्रदर्शन का आज चौथा दिन है लेकिन आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि इन लोगों से मिलने नहीं आया है। सहायक पुलिस कर्मियों ने बताया कि चुनाव के समय सभी नेता वोट मांगने आते हैं लेकिन हमारी मजबूरी को देखने के लिए कोई भी फिलहाल नहीं आए हैं।
सहायक पुलिस कर्मियों ने बताया कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी तब तक हम लोग अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेंगे
पाँच सौ महिला सहायक पुलिस कर्मी मना रही जितिया पर्व, उपवास कर अपने सहकर्मियों को बढ़ा रही हौसला
मोरहाबादी मैदान में आए सैकड़ों महिला सहायक पुलिस कर्मी में पांच सौ सहायक महिला पुलिसकर्मी जितिया पर्व मना रही है। जितिया मना रही सहायक महिला पुलिसकर्मी उपवास पर है और उपवास के सहारे अपने सभी साथियों की हौसला बढ़ा रहे हैं।
महिला सहायक पुलिस कर्मियों ने बताया कि सरकार इस तरीके से बर्ताव कर रही है कि रोजमर्रा के लिए पानी तक की सुविधा को बंद करा दी है। वहीं कुछ महिलाओं ने बताया कि बाथरूम की यहां पर कुछ भी व्यवस्था नहीं की गई है। बाथरूम के लिए 15 से ₹20 देना पड़ रहा है जो हम सभी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। उपवास किए हुए महिला सहायक पुलिस कर्मियों ने बताया कि सरकार के हर मंसूबों का जवाब हम सभी मिलकर देंगे और माता रानी का आशीर्वाद हम लोगों पर बना हुआ है।
अलग-अलग जिले से आए महिला सहायक पुलिस कर्मियों ने बताया कि महज दस हज़ार में अपने घर को चलाना बहुत ही मुश्किल हो चला है। महंगाई के दौर में दस हज़ार की कुछ भी कीमत नहीं है। महिला सहायक पुलिस कर्मियों ने बताया कि पहले 1 महीने राशन की कीमत लगभग दो से ₹3000 होता था लेकिन आज के दिन में वही राशन पाँच से छह हजार का हो गया है। तो ऐसे हालात में अपनी आजीविका को चला पाना बहुत ही मुश्किल हो गया है।आपको बता दें कि पिछले साल 12 सितंबर को 2500 सहायक पुलिसकर्मियों ने मोरहाबादी मैदान में डेरा डंडा डाल दिया था। महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर आंदोलन में शामिल हुई थी। 18 सितंबर 2020 को बैरिकेडिंग किए जाने पर सहायक पुलिसकर्मी उग्र हो गए थे। बैरिकेडिंग को तोड़ दिया गया था फिर पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे गए थे। इस झड़प में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।






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