बोकारो: वर्ष 2017 में 3088 पदों के लिए पंचायत सचिव व हिंदी टाइपिंग भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी जिसकी सारी प्रक्रिया समाप्त कर लिया गया है केवल अंतिम मेघा सूची जारी कर नियुक्ति करना शेष रह गया है पर आज तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है।
बताते चलें कि 18 दिन तक अनिश्चितकालीन व्यक्तिगत सत्याग्रह व आमरण अनशन स आंदोलन के दौरान मुख्य सचिव वार्ता में स्पष्ट रूप से कहा गया था की कर्मचारी चयन आयोग से सलाह मशवरा कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दिया जाएगा। सत्याग्रही रमेश लाल, गुड़िया कुमारी, गुलाम हुसैन, नेहा प्रवीण, सुमित अंदाजा, बताते हैं की 11 सदस्य कांग्रेस कमेटी ने भी पंचायत सचिव सफल अभ्यर्थी को धोखा दिया है। मंत्री रामेश्वर उरांव व मंत्री श्री बादल पत्रलेख ने स्पष्ट रूप से कहा था कि सरकार को कुछ समय दिया जाए जो भी अधिकारी है उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बैठक आयोजित किया जाएगा और अगले एक-दो महीने में नियुक्ति प्रक्रिया को भी चालू कर दिया जाएगा लेकिन अब तक से नहीं चालू होना सरकार की मंशा पर बहुत बड़ा सवाल का निशान है।
अभ्यर्थी गुलाम हुसैन बताते हैं कि झारखंड में पंचायत सचिव व लिपिक के पांच हजार युवा बेरोजगार हैं,बेरोजगारी से छात्र मानसिक तौर पर परेशान है। और इसी लिए बीते दिनों में बेरो़गारी की बढ़ती चरम सीमा को दिखाने के लिए 16 नवम्बर 2020 को पूरे झारखंड में बेरोजगर दिवस मनाया गया।
एक मार्च 2021 को पंचायत सचिव सफल अभ्यर्थियों के द्वारा विधानसभा भवन का घेराव भी किए । नतीजतन वहां से भी अधिक से अधिक आश्वासन ही हाथ लगा
पंचायत सचिव अभ्यर्थी, बेरोजगारों की सुनिए सरकार यह बहाली पूर्व की रघुवर सरकार के कार्यकाल में ही बहुत देरी से प्रक्रिया चल रही थी राज्य में नई सरकार बनने के साथ 4913 अभ्यर्थियों की उम्मीद ज्यादा थी पर आज तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है।
कोरोणा महामारी के इस दौर में पंचायत में पंचायत सचिव की राज्य में भारी कमी है अगर यह नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होती तो राज्य के विकास में अहम योगदान दे रहे होते सरकार दावे तो बड़ी- बड़ी करती है लेकिन सरकार के दावों का कोई मतलब नहीं।




