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दादी जानकी को वैज्ञानिकों द्वारा विश्व भर “सर्वोच्च स्थिर मन महिला’ की उपाधि दी जा चुकी है।

राँची :प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड रॉची में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय प्रमुख प्रशासिका दादी जानकी के पुण्य तिथि को वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाया गया।


कार्यक्रम में उपस्थित भुवनेश प्रताप सिंह, निदेशक, झारखंड एड्स कन्ट्रोल सोसाईटी ने कहा की एक आध्यात्मिक नेता के रूप में विश्व विख्यात दादी जी के जीवन का केंद्र बिंदु था- ईश्वरीय कार्य और ईश्वरीय इच्छा के प्रति दिल और दिमाग से सम्पूर्ण समर्पण दादी जी का मानना था कि परमात्मा पवित्र प्रेम और दिव्य विवेक के स्रोत हैं और इन्हीं दोनों गुणों को उन्होंने अपने जीवन का आधार बनाया। इस आध्यात्मिक शक्ति ने दादी जी को विश्वभर की आत्माओं के लिए प्रकाश स्तंभ बना दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए के० एल० अग्रवाल, निदेशक विमानपत्तन, रांची ने कहा कि दादी जानकी जी ने दादी प्रकाशमणि जी के बाद संस्था की प्रमुख प्रशासिका के रूप में विश्व परिवर्तन एवं आध्यात्मिक पुनरूत्थान का कार्य किया है। दादी जानकी जी को वैज्ञानिकों द्वारा विश्व भर “सर्वोच्च स्थिर मन महिला’ की उपाधि दी गई है। दादी जानकी जी 103 वर्ष की आयु में इतनी ऊर्जावान थीं कि एक वर्ष में भारत सहित दुनिया के कई देशों की यात्रा करते हुए 50 हजार किलोमीटर की यात्रा तय की जो अपने आप में एक विश्व रिकार्ड है। उनमें अंतिम समय तक युवाओं जैसा उत्साह देखा गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने दादी जी को स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया।

सुधीर प्रसाद समाजसेवी एवं व्यवसायी ने कहा दादी जी की प्रेरणा से आज ब्रिटेन में अनेक ईश्वरीय सेवा केन्द्र स्थापित किये जा चुके हैं तथा दुनिया के करीब 140 देशों में भी ईश्वरीय केन्द्रों की स्थापना हो चुकी है। संस्थान के विद्यार्थी एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं अस्पतालों, विद्यालयों, जेलों, शरणार्थी शिविरों, बेसहारा बच्चों, वेश्याओं एवं व्याचिग्रस्त लोगों के आवासों में जाकर उनकी सेवा करते हैं तथा व्यसनियों को भी व्यसन मुक्त करने की कोशिश करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों, मूल्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर दादीजी ने शुरूआत की, परिणामस्वरूप अनेक लोगों एवं समुदायों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया।

सुमन सिंह, पूर्व निदेशक इनर व्हील क्लब एवं समाजसेवी ने कहा ब्रह्माकुमारी संस्था में समर्पित 46 हजार से भी अधिक बहनों की अभिभावक के साथ-साथ “माँ” भी रहीं। दादी जी ने अकेले ही सौ देशों में ईश्वरीय पैगाम दिया। ये सब दादी जी के कर्मठ सेवा के प्रति लगन और अथक परिश्रम का कमाल है। दादी जी ब्रह्माकुमारी संस्था का कुशलता पूर्वक नेतृत्व करते हुए लाखों लोगों की प्रेरणापुंज बनी। दादी जी को देश तथा विदेशों द्वारा कई राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय अवार्डो से नवाजा जा चुका है।

ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा 104 वर्ष की उम्र में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दादी जानकी जी का देहावसान हुआ। दादी जानकी का पूरा जीवन समाज सेवा में समर्पित रहा है। बचपन से ही दादी जी को इस बात की चिंता बनी रहती थी कि वे किस प्रकार दूसरों के जीवन को सुखी बना सकें। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अनेक भारतीय शास्त्रों के अध्ययन से ओत-प्रोत था। आजादी के तुरंत बाद जाति प्रथा सहित अनेक सामाजिक परम्पराओं के बंधनों को तोड़ते हुए दादी जानकी जी भी एक सक्रिय महिला आध्यात्मिक नेत्री के रूप में उभरीं। ब्रह्माकुमारीज के साकार संस्थापक ब्रह्मा बाबा के सानिध्य में 14 वर्षतक दादी जी ने गहन योग तपस्या की।

वर्ष 1950 में संस्था कराची से माउंट आबू स्थान्तरित हुआ, जहाँ से विश्व सेवाओं का शंखनाद हुआ। वर्ष 1974 में दादी जानकी पहली बार विदेशी जमीं पर मानवीय मूल्यों का बीज रोपने के लिए निकलीं। दार्द ने भले ही चौटी तक पढ़ाई की थी परंतु अपने प्यार, स्नेह, अपनापन और मूल्यों की भाषा के द्वारा विदेशी जमीं पर भारतीय संस्कृति को स्थापित कर दिया। धीरे-धीरे यह कारवां बढ़ता रहा। आज विश्व भर में लोग भारतीय आध्यात्म और राजयोग मेडिटेशन को दिन्चचा में शामिल कर जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।

इस अवसर पर दादी जी की स्मृति में ब्रह्मा भोजन का आयोजन किया गया तथा सभी लोगों ने दादीजी को श्रद्धा सुमन अर्पित किये तथा सदा मधुरता, सरलता, परोपकारिता सहानुभूति फ्रांकदिल वाली विश्व कल्याणी, वरदानी महादानी दादी जी के कदमों में बापदादा के श्रीमत अनुसार कदम पर चलकर स्वःपरिवर्तन से विश्व परिवर्तन की सेवा का दृढ़ता से व्रत लिया गया। कार्यक्रम में बाल कलाकारों द्वारा नृत्य भी प्रस्तुत किये गयें।

Deepak Verma

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