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आरोपी को पकड़ने में मदद नही कर रही झारखंड पुलिस, राज्यपाल को सौपा ज्ञापन !!

रांची- साहिबगंज पुलिस एक बार फिर से विवाद में है, इससे पहले पंकज मिश्रा को लेकर साहिबगंज पुलिस कई बार विवाद में पड़ी है। कई सवाल उठे हैं और अब छत्तीसगढ़ पुलिस को मदद नही करने का आरोप साहिबगंज पुलिस पर है। रायपुर सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू ने यह आरोप लगाया है। हाल ही राज्यपाल रमेश बैस जब रायपुर स्थित घर पहुंचे, तो हरख मालू ने मुलाकात कर फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी और झारखंड पुलिस को छत्तीसगढ़ पुलिस की मदद करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। रायपुर की पुलिस ने कुछ आरोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन बचे हुए आरोपी अभी फरार चल रहे है।जिनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। आरोप है कि झारखंड की पुलिस छत्तीसगढ़ पुलिस की मदद नहीं कर रही । आरोपियों को छत्तीसगढ़ पुलिस जब गिरफ्तार करने के लिए साहिबगंज गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उनकी मदद करने की बजाए कागजातों की कमी बताकर उन्हें थाने में ही बिठा दिया और इस मौके का फायदा उठाकर चोर वहां से फरार हो गए. मामले में एक वर्ष बीतने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी हैं। हरख मालू सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष थे उस समय यह घटना घटित हुई थी। हालांकि राज्यपाल बैस ने आश्वासन देते हुए कहा कि झारखंड पुलिस छत्तीसगढ़ पुलिस की मदद जरुर करेगी, इस संबंध में अधिकारियों के साथ राजभवन बैठक करेगे। पुलिस ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है उसकी जानकारी लेने के बाद उनकी जल्द गिरफ्तारी के लिए निर्देशित करेंगे।

जिस थानेदार को ज्वेलरी बरामदगी के लिये मिला रिवार्ड, बाद में भेजा गया जेल !!

बता दे कि तीन अक्टूबर 2021 को नवकार ज्वेलर्स से 80 लाख के सोने-चांदी के जेवर चोरी की वारदात हुई थी। झारखंड सिमडेगा पुलिस ने चोरों को पकड़ा और सारा सामान गायब कर दिया। चार आरोपित पकड़े गए थे, जिसमें केवल पहले दो की ही जानकारी रायपुर पुलिस को दी गई। जब मामले ने तुल पकड़ा तो झारखंड पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित की। वही रांची के डीआइजी की जांच रिपोर्ट में भी सिमडेगा के तत्कालीन एसपी शम्स तवरेज पर गंभीर आरोपों लगे। डीआइजी ने जांच में पाया था कि एसपी ने जेवरों की बरामदगी व अपराधियों की गिरफ्तारी मामले की जानकारी रायपुर पुलिस से छिपाकर रखी। अपनी प्राथमिकी में रायपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी का भी जिक्र नहीं किया। चोरी के जेवरों के साथ चार को पकड़ा था और बताया सिर्फ दो को। जेवरात 80 लाख के चोरी हुए थे, गिरफ्तारी के चार दिन बाद प्रेस कांफ्रेंस कर 25 लाख के जेवर की बरामदगी दिखाई। बांसजोर के तत्कालीन जिस थानेदार को इसके लिए रिवार्ड दिया, बाद में डीआइजी की जांच के बाद उसी थानेदार को जेल भी भेजा गया। बाद में एसआइटी की जांच में सिमडेगा के पुलिसकर्मियों-पदाधिकारियों की निशानदेही पर 15 किलोग्राम चांदी की बरामदगी हुई। जांच के बाद तीन पुलिस कर्मियों को दोषी पाया गया, जिन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया।

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