रांची: पिताश्री ब्रह्मा बाबा की स्मृति सप्ताह में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय
सेवा केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड, रांची में रविवार को शांति दिवस समारोह आयोजित की गई।

कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत गान, परमात्म आधारित नृत्यगान और प्रदर्शनी के माध्यम से ब्रह्मा बाबा के जीवनी और उनके तन में परमपिता परमात्मा के अवतरण के बारे में दिखाया गया। तत्पश्चात् गाईडेड मेडिटेशन का अभ्यास किया गया। अन्त में केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने आगन्तुकों को
परमात्म आर्शिवचन और शांति संदेश दिया। बाबा को जीवन शैली पर एक अतिसुन्दर नाटिका प्रस्तुत की गई

इस समारोह में उपस्थित राष्ट्रीय द्वितीयक कृषि संस्थान
नामकुम, रॉची के निदेशक अभिजीत जी ने प्रजापिता ब्रह्मा की स्मृति में शांति स्तम्भ पर दीप प्रज्जवलित करके श्रद्धा सुमन अर्पित किया तथा कहा कि ब्रह्मा बाबा एक ऐसे विश्व व्यापी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के
संस्थापक थे, जिसके द्वारा सम्पूर्ण विश्व में आध्यात्मिक क्रांति आ रही है तथा नव सृष्टि की रचना हो
रही है।

कार्यक्रम में शिवयोग फोरम की प्रतिनिधि दीप्ति सिंह ने कहा कि विश्व की इस अंधकारमय विनाशकालीन परिस्थिति में स्वयं परमात्मा ने ब्रह्मा बाबा को आदर्श युगपुरूष बनाया। यदि मानव उनके समान बनने का लक्ष्य जीवन में धारण करे तो सहज ही विश्व का अंधकार तथा स्वयं के जीवन का अंधकार समाप्त हो जाये।आर्ट ऑफ लिविंग के सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि दिग्भ्रमित आत्माओं को सही राह दिखाने वाले पिता श्री ब्रह्मा हमारे लिए आशा के प्रकाश पुंज है।

वहीं कार्यक्रम में उपस्थित रांची जी०ई०एल० चर्च के पादरी आलोक मिंज ने कहा कि स्वर्णिम युग की स्थापना के लिए उन्होंने मातृशक्ति का जोरदार आवाह्न किया नातृ शक्तियों की इस पूर्ण सक्रियता से स्वर्णिम युग शीघ्र ही इस धरती पर सभी के लिए आयेगा। आचार्य डॉ० बालेश्वर नाथ पाठक ने कहा एकरस गहन योग तपस्या करने के कारण ब्रह्मा बाबा आध्यात्मिक शक्ति का एक स्रोत बन गये थे। आर्ट ऑफ लिविंग के रिया जी ने कहा आज भी पिता श्री ब्रह्मा की शिक्षाओं से हर एक को अपने मनोविकारों पर बिजय प्राप्त कर उन्हीं के समान दिव्य बनने की प्रेरणा मिलती है।
केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा गुजर गई शताब्दी की कई झलकियों लोगों ने देखीं व अनेक स्तंभ अमर आत्माओं को याद किया, किन्तु विश्व इतिहास का एक उज्जवल पक्ष मानव दृष्टि से ओझल रहा जब विगत सदी के वर्ष 1937 में असाधारण व्यक्तित्व वाले प्रजापिता ब्रह्मा को विश्व पिता शिव ने नाध्यम बनाकर स्वर्णिम युग का सूत्रपात किया। प्रजापिता ब्रह्मा ने एक ऐसी बेहतर विश्व व्यवस्था की बुनियाद रखी जहाँ समानता, स्वतंत्रता शिक्षा स्वास्थ्य व समृद्धि होगी। अपने आदि में स्वर्णिम रहे इस विश्व में पाँच विकारों के कारण नैतिकता का हारा हुआ है। अभी प्रजापिता ब्रह्मा की लाखों मानस संतानों ने संपूर्ण ब्रह्मचर्य के दृढ़वती बन इस विशक्त विश्व वायुमंडल को परिवर्तन करने का बीड़ा उठाया है। उनके द्वारा स्थापित ब्रह्माकुमारी संस्थान विशाल वट वृक्ष बन शांति के महामंत्र की ध्वज पताका पाँचों महाद्वियों में फहरा रहा है व आध्यात्मिकता की शक्ति से स्वर्णिम युग ना रहा है। यह शक्ति कोई जादू, भक्ति या चमत्कार का परिणाम नहीं है बल्कि ज्योतिबिन्दु परमात्मा से बुद्धियोग स्थापित करने से प्राप्त आध्यात्मिक शक्ति है जिसे राजयोग कहते हैं। राजयोग से स्थाप्ति स्वर्णिम युग की योगज
संताने दैवी गुणों से संपन्न होगी। अतः पिताश्री ब्रह्मा द्वारा पवित्र बनो, राजयोगी बनों का संकल्प विश्व के सामने रखा गया।

इस कार्यक्रम में पवन मिश्रा ज्योतिषी, पी०सी० गर्ग पूर्व महाप्रबंधक सी०सी०एल०, पंडित दयानन्द पाण्डेय आदि गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। तत्पचात अंत में ब्रह्माभोजन का आयोजन हुआ। ब्रह्मा बाबा की स्मृति में ईश्वरीय विद्यार्थियों ने प्रेम पूर्वक पत्र लिखे जिनका सभागार में दिग्दर्शन हुआ।
ज्ञातव्य हो कि ईश्वरीय विश्व विद्यालय ब्रह्माकुमारी केन्द्र चौधरी बगान, हरित भवन के सामने हरमू
रोड, रॉची में ज्ञान योग सत्र प्रति दिन उपलब्ध है।





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