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पंजाब, असम, चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर झारखंडी लड़कियों का हुआ है ट्रैफिकिंग : महुआ माझी

रांची : पंजाब, असम, चंडीगढ़ जैसे राज्यों में झारखंड की लड़कियों का ट्रैफिकिंग बड़े पैमाने पर हुआ है। आज भी ट्रैफिकिंग हो रहे हैं लेकिन अब इसकी संख्या काफी कम हो गई है। क्या बात है राज्यसभा सांसद डा महुआ माजी ने एसोसिएशन फोर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स ट्रस्ट (आली) की ओर से रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में प्रोमोटिंग ‘राइट टू मोबिलिटी’ एंड एक्सेस टू जस्टिस फोर ए वायलेंस फ्री लाइफ इन झारखण्ड’ विषय पर एक राज्य स्तरीय कोलिकियम में कही।

महुआ माजी ने कहा कि महिलाओं पर आज भी हिंसा हो रही है पर इसे रोकने के लिए सरकार द्वारा कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। महिला हिंसा को रोकने के लिए सरकार द्वारा रोजगार से जोड़कर कई ट्रेनिंग प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं इससे पलायन और महिला हिंसा दोनों ही रुक रहे हैं। झारखंड में महिलाओं की सुरक्षित गतिशीलता के अधिकार को बढ़ावा देने व उनकी न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हिंसा मुक्त जीवन के लिए रणनीति बनाई जा जाए।

इस राज्य स्तरीय ‘कोलिकियम’ में मुख्य अतिथि के रूप में डा. महुआ माजी के अलावा श्रम आयुक्त प्रवीण कुमार टोप्पो, आदिवासी कल्याण आयुक्त मुकेश कुमार, अभिषेक कुमार झालसा के डिप्टी सेक्रेटरी एवं अभय शाह चेयर परसन चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से उपस्थित थे। आली की ओर से रेशमा सिंह ने अपने वक्तव्य में विगत एक वर्ष के कार्य के संबंध में बताया कि सुरक्षित पलायन के लिए जागरूकता पर कुल 138 बैठकें की गई। जिसमे लगभग कुल 2 हजार महिलाओं ने भाग लिया है। इसी दौरान मानव तस्करी के कुल 64 केस आली के सहयोगी संस्थाओं द्वारा देखा गया है।

अपने शहर, राज्य और देश में अच्छे रोजगार युवाओं को उपलब्ध होनी चाहिए : प्रवीण टोप्पो

श्रमाआयुक्त प्रवीण कुमार टोप्पो और आदिवासी कल्याण आयुक्त मुकेश कुमार ने मिलकर काम करने का आश्वाशन दिया गया। प्रवीण टोप्पो ने कहा कि रोजगार राज्य के लिए बड़ा मुद्दा है, इस पर सरकार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। राज्य ही नहीं बल्कि देशभर में रोजगार की स्थिति अच्छी नहीं है। इसलिए लोग बाहर दूसरे राज्य और दूसरे देश की ओर पलायन कर रहे हैं। यह पलायन सुरक्षित है पर इस पर भी रोक लगनी चाहिए। और अपने शहर, अपने राज्य, और अपने देश में युवाओं को अच्छे रोजगार मिलने चाहिए।

कोलिकियम 22 जिलों के 75 लोग हुए शामिल

कोलिकियम के दौरान सिमडेगा,कोडरमा और गुमला से आईं आली की केस वर्कर प्रियंका सिन्हा, मेरेन सोरेन और शांति कुमारी ने ज़मीनी हक़ीक़त बताते हुए संघर्षशील महिलाओं के जीवंत अनुभवों को साझा किया। बब्ली सिंह द्वारा संकल्प पत्र पर विस्तृत रूप से जानकारी दी गयी जिसमें मुख्य रूप से हितधारकों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ में कार्यक्रम में शिखा लाकरा प्रिया फाउन्डेशन और प्रीतम क्राई से शामिल रहे और अपने विचार रखे। ‘कोलिकियम’ में 22 जिलों से 75 लोग शामिल हुए जिसमें रांची में स्थानीय स्तर पर काम करने वाली संस्थाए और कई विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
अंत में आली ने ‘राइट टू मोबिलिटी’ और सुरक्षित पलायन के लिए सरकार और संबंधित विभाग के लिए अनुशंसाएं जारी की गई।

Deepak Verma

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