रांची : राजनीति में अपराधियों या राजनीति का अपराधीकरण को आमजन नियति मान मौन साध लिए हैं. राजनीति क्रिमिनल, गुण्डातत्व, दबंगो का पर्यायवाची बन चुका हैं. लोगों ने मान लिया है कि नेता मतलब ही दबंग होते हैं. ये मान लिया है कि राजनीति करने के लिए बाहुबली, अपराधी होना आवश्यक है.
पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में अपराधी तत्व का जमावड़ा
आगामी 10 फरवरी 2022 से 10 मार्च 2022 तक, देश के 5 राज्यों में विधानसभा का चुनाव है. क्या आप जानते हैं पांच राज्यों से कुल 689 उम्मीदवार में 28 फ़ीसदी पर राजनैतिक से लेकर अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं.
सबसे ज्यादा अपराधी उत्तर प्रदेश में
वर्ष 2022 के चुनाव में अपराधी, क्रिमिनल, गुण्डातत्व का दबदबा साफ दिख रहा है. सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हर कोई अपराधिक तत्वों को टिकट देकर स्वयं को पाक साफ बताने की होड़ में लगे हैं.
आंकड़ों में उत्तर प्रदेश
आंकड़ों में देखें तो उत्तर प्रदेश में जहां समाजवादी पार्टी के 75% प्रत्याशी दागी हैं. तो राष्ट्रीय लोक दल 59% दागी उम्मीदवारों को टिकट दिया है. वहीं, भाजपा के 51% दागी उम्मीदवार हैं तो, कांग्रेस, बसपा व आम आदमी पार्टी में से क्रमशः 36% 34% व 15% दागी प्रत्याशी लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा ले रहे हैं.
अपराध में लिप्तता का प्रमाण पत्र दिखाने पर भी टिकट मिल जाता है
साधारण सी सरकारी नौकरी के लिए उच्च स्तरीय छानबीन होती है. मगर देश चलाने हेतु अपराधी तत्व होना राजनैतिक कौशल बन गया है. कितनी हास्यास्पद है, कि जिस संस्था को स्वच्छ छवि के उम्मीदवार को चुनाव में भाग लेने की जिम्मेदारी सौपी गयी है. वहीं प्रत्याशी अपने अपराधी होने का साक्ष देकर चुनाव लड़ लेते हैं.
कानून आमजन के लिए
कानून का डंडा दो पहिए वाहन चालक, कोरोना प्रोटोकॉल पालन करवाना, फुटपाथ पर दो जून की रोटी को जूझ रहे गरीबों को उजाड़ना तक सीमित रह गया है.
राजनीति का पैमाना स्थापित हो
अन्य सरकारी सेवार्थ चयन प्रक्रिया की तरह की कुछ शर्तें यथा: शिक्षा, चरित्र अनुभव, जनाधार जैसी शर्त हो. देश या राज्य संचालन कार्य में शिक्षित वर्गों को आगे लाने की प्रक्रिया निहित हो. राजनीति से तौबा कर लिए बुद्धिजीवी वर्ग को सुलभ रास्ता देने की ज़रूरत है. मतदाता भी जाति धर्म से ऊपर उठे. ईमानदार व स्वच्छ छवि के नेताओं को समर्थन दें. अपराधी तत्वों को धता बताएं. वरना वह दिन दूर नहीं जब देश के बुद्धिजीवी वर्ग अपराधियो से न्याय की गुहार लगाएंगे. अब अपराधी तो अपराधी हैं.
फैसला आपका,
@ गौतम





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