रांची : साहिबगंज की महिला थाना प्रभारी रूपा तिर्की की मौत मामले में राज्य सरकार से सीबीआई जांच कराने की मांग की जा रही है, परंतु राज्य सरकार अब तक नहीं करा पायी है। जबकि धनबाद मामले में राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी। इससे राज्य सरकार की दोहरी मानसिकता परिलक्षित हो रही है। ये बातें रांची की मेयर डॉ. आशा लकड़ा ने कही।
उन्होंने कहा की राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं आदिवासी हैं। फिर भी उनकी मानसिकता आदिवासी विरोधी है। रूपा तिर्की झारखंड की बेटी थी न कि पड़ोसी राज्य की। क्या इस राज्य की बेटी के साथ कोई व्यक्ति जघन्य अपराध करेगा तो उसके परिजनों को न्याय नहीं मिलेगा? क्या झारखंड की आदिवासी बेटी की अस्मिता के साथ इसी प्रकार खिलवाड़ किया जाता रहेगा?
रूपा तिर्की के माता-पिता अपनी बेटी की मौत को आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या बता रहे हैं। सीबीआइ से इस मामले की जांच कराने की मांग कर रहे हैं। परंतु राज्य सरकार एसआइटी का गठन कर इस मामले की जांच कराने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। आम लोगों को भी यह जानकारी है कि एसआइटी राज्य सरकार की जांच एजेंसी है। राज्य सरकार जैसा चाहेगी, एसआइटी उसी दिशा में जांच करेगी। कुल मिलाकर राज्य सरकार इस मामले को सही दिशा से भटकाने का काम कर रही है।
रूपा तिर्की की मौत मामले में उनके माता-पिता ने जिन लोगों को नामजद आरोपित बनाया है, उससे अब तक एसआइटी की टीम ने पूछताछ क्यों नहीं की। साहिबगंज के जिस पंकज मिश्रा का नाम इस मामले में सामने आया और रूपा तिर्की के माता-पिता ने संबंधित व्यक्ति को इस मामले में नामजद आरोपित बताया है, उससे एसआइटी की टीम पूछताछ क्यों नहीं कर रही है?
क्या हाई प्रोफाइल लोग राज्य सरकार के हिमायती हैं या वे राज्य सरकार की छत्रछाया में पल रहे हैं। समाचार पत्रों में साहिबगंज के पंकज मिश्रा के काले कारनामे को उजागर किया जा चुका है। फिर भी राज्य सरकार पंकज मिश्रा के नाम पर मौन क्यों है? राज्य सरकार की चुपी से यह जाहिर हो रहा है कि पंकज मिश्रा को इस मामले में क्लीन चिट देने की तैयारी की जा रही है।
झारखंड राज्य के अधिकांश सामाजिक व आदिवासी संगठन लागातार रूपा तिर्की की मौत मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं। फिर भी राज्य सरकार सीबीआई जांच कराने की अनुशंसा क्यों नहीं कर रही है? क्या राज्य सरकार सीबीआई से इस मामले की जांच कराने को लेकर भयभीत है।
यदि राज्य सरकार वास्तव में आदिवासियों की हितैषी है तो सीबीआइ से रूपा तिर्की की मौत मामले की जांच कराने की अनुशंसा की जाए। राज्य सरकार आदिवासियों को यह भरोसा दिलाए कि झारखंड राज्य में आदिवासियों पर जुल्म करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। झारखंड के आदिवासियों को अपने राज्य में इंसाफ मिलेगा।





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