रांची : मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी;(मराठा परिवार) पंडित दीनानाथ मंगेशकर के घर 28 सितंबर, 1929 प्रथम पुत्री लता का जन्म हुआ. पंडित दीनानाथ मंगेशकर स्वयं भी रंगमंच के कलाकार और गायक थे।
अनेक नामों से अलंकृत थी लता दीदी
स्वर-साम्राज्ञी, राष्ट्र की आवाज, सहस्त्राब्दी की आवाज, भारत कोकिला जैसे अनेक नामों सेे अलंकृत भारत की लता मंगेशकर जन-जन में “लता दीदी” के नाम से मशहूर थीं. “टाईम पत्रिका” ने उन्हें भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है.”
पुरस्कार
लता दीदी को वर्ष वर्ष 1969 में, भारत सरकार ने पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया, 1989 में, दादा साहब फाल्के पुरस्कार, वर्ष 1999 में, पद्म विभूषण सम्मान। और वर्ष 2001 में, देश का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया. साथ ही समय समय पर अनेक सम्मान से सम्मानित, लता दीदी स्वयं में देश की सर्वोच्च सम्मान थीं. और रहेगी. लता जी का जाना संगीत जगत के लिए न पाटने वाला खाई के समान है.
केरियर
अपनेे सुहाने संगीत की शुरुआत स्टेज गायकी से हुई. लता जी को पहली बार स्टेज पर गाने के लिए 25 रुपए मिले थे। इसे वह अपनी पहली कमाई मानती थीं।
संगीत के सफर की शुरुआत मराठी गाने से
1942 में फिल्म लताजी ने पहली बार मराठी भाषा में फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए गाना गाया।
हिन्दी संगीत के सफर की शुरुआत
लता मंगेशकर सन् 1949 को फिल्म ‘महल’ के लिए अपनी आवाज दीं. और विश्व को अपनी प्रतिभा का कायल बना दिया. और फिर बगैर रुकेे अनवरत अपने संगीत को जारी रखते हुए शोहरत की बुलंदियों पर काबिज रहीं.
उपलब्धि
लता मंगेशकर, जिनका छ: दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है. छह दशकों से ज़्यादा संगीत की दुनिया को अपनी आवाज से गुलज़ार कर रखी थीं लता दीदी ने. सरस्वती उपासक लता मंगेशकर ने 20 भाषाओं में 30,000 गीतो को अपनी आवाज दी हैं. उनकी आवाज़ सुनकर कभी किसी की आँखों में आँसू आए, तो कभी सीमा पर खड़े जवानों को सहारा मिला. लता जी स्वयं को ताउम्र संगीत को समर्पित कर रखा. लेकिन उनकी पहचान भारतीय फ़िल्मी गायन में सबसे बड़ा योगदान रहा है.
महाप्रयाण
आज दिनांक 6 फरवरी 2022 को इनकी 92 वर्ष की उम्र में, कोविड से जुड़े कॉम्प्लिकेशन के कारण ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल, मुंबई में अंतिम सांस लीं. और अपने संगीत के दिवानों को रोता कलपता छोड़ अपने अंतिम सफर को प्रस्थान कर गयीं.
लता मंगेशकर की याद में दो दिवसीय राष्ट्रीय शोक मनाया जाएगा। सम्मान के रूप में दो दिनों तक राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा
भारत सरकार ने दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया, पूर्ण राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा, दो दिन तक तिरंगा ध्वज आधा झुका रहेगा, मिलिट्री वाहन में अंतिम यात्रा पर अंतिम यात्रा रवाना होगी.”लता दीदी” आपकी आवाज के दीवाने पूरी दुनिया मे है. वे सदैव हमारे हृदय में अमर रहेंगी. थंडर न्यूज परिवार की ओर से अश्रुपूर्ण नेत्रों से विनम्र श्रद्धांजलि.
@ गौतम





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