राँची : आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (राँची महानगर) का प्रतिनिधिमंडल झारखण्ड उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के मुख्य अवर सचिव शैलेश सिंह से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने माँग किया कि झारखंड में सभी शिक्षण संस्थानों को अविलंब खोला जाए।
उनका कहना है – विगत 1 वर्षों में झारखंड की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है, ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे छात्रों के पास तकनीकी उपकरण के अभाव के कारण शिक्षा से वंचित रह गए है। महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, यूजीसी की दिशा – निर्देश को ध्यान में रखते हुए कक्षाएँ अविलंब आरंभ करें।
अखिल भारतीय विद्यार्थी के मंत्री दुर्गेश कुमार ने कहा कि विगत लगभग 1 वर्ष से कोरोना महामारी के कारण सभी शिक्षा संस्थान बंद जबकि वर्तमान में सारा कुछ सामान्य हो रहा है। इस दौरान आनलाइन कक्षाएँ प्रारंभ रही परंतु अधिक से अधिक छात्रों के पास मोबाइल, लैपटॉप, कम्पयूटर, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल उपकरण उपलब्ध होने के कारण वे शिक्षा लेने से वंचित रहे, युवा पीढ़ी कोरोना काल के लंबे अंतराल के पश्चात शिक्षा से दूर होता गया है।
झारखंड सरकार से प्रश्न किया गया कि जब जनमानस की सभी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाएँ विमान सेवा,ट्रेन परिचालन मधुशाला,सिनेमा हॉल, मॉल, सब्जी मार्केट जब सुचारु रुप से चल सकते हैं तो शिक्षण संस्थान बंद क्यों ? शिक्षण मामले पर झारखण्ड सरकार क्यों चुप्पी साधे बैठी है ?
राज्य सरकार अपनी मंशा साफ़ करे ? अन्यथा छात्रों के हित में अभाविप चरणबद्ध तरीके से आदोलन करने को बाध्य होगी।
वार्ता के क्रम में झारखंड उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मुख्य अपर शैलेश कुमार ने कहा कि जल्द ही इस विषय की ओर राज्य सरकार का ध्यान आकृृष्ट कराते हुए व यूजीसी की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए अभाविप की माँग को पूर्ण किया जाएगा। इस मौके पर अभाविप प्रतिनिधिमंडल में प्रादेशिक विश्वविद्यालय प्रमुख विशाल सिंह, आकाश यादव, कुमार दुर्गेश,शुभम पुरोहित आदि उपस्थित थे।




