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भारत है मातृ प्रधान भूमि इसलिए वन्दे मातरम् कहा जाता है।

“ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र में मना मातृत्व दिवस।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान हरमू रोड राँची में “मदर्स डे” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ० किरण त्रिवेदी, स्त्री रोग विशेषज्ञ ने अपने उद्गार में कहा कि सबसे बड़ी माँ शिव परमात्मा है जिसने इस संसार की बड़ी सुंदर रचना की और हम सभी आत्माओं, बच्चों को इस सृष्टि रंगमंच पर सुंदर रचना को देखने और खेल खेलने के लिए भेजा, शिव परमात्मा ने संसार में अनेक माताओं को रचा जिन्होंने अपने ममतामई वात्सल्य पूर्ण दिव्य गुणो से संतान की पालन की।

डॉ० अंजना देवा उपमहाप्रबंधक आर०डी०एस०आई०एस०, सेल ने कहा माता केवल माता नहीं लेकिन माता एक विश्व की निर्माता होती है, माँ का दिल वात्सल्य से पूर्ण होता है, वह कभी किसी को दुखी नहीं देख सकती, माता केवल बच्चों को जन्म ही नहीं देती बल्कि उसका जीवन भर साथ देती है।

सेवानिवृत आचार्य डॉ० चित्रा ने कहा माँ बच्चे की प्रथम गुरु और शिक्षक होती है, माँ के संस्कारों का प्रभाव बच्चों में दिखता है, माँ बच्चे के चरित्र का निर्माण भी करती है, माँ में त्याग की शक्ति, शांति, सहनशीलता और प्रेम वात्सल्य, के गुणों का भंडार होता है, वह अपने बारे में न सोचकर सदा अपने परिवार और अपने बच्चों के लिए सोचती है और माँ सदा दूसरों के लिए जीती है।

डॉ० प्रियंका स्त्री रोग विशेषज्ञ ने कहा अगर आज की माताएं अपने को अपने घर की माता ना समझ एक समाज की माता ना समझ एक देश की या विश्व की माता बन अपने वात्सल्य के गुणों को वेहद विश्व में फैला दे तो एक माता जगत माता बन नव निर्माण कर सकती है, सारे विश्व की माँ परमात्मा शिव निराकार, इन्हीं सारे गुणों से भरने के लिए आज संसार में आकर फिर से यह संसार स्वर्ग बने ऐसे श्रेष्ठ गुणों से भरपूर हमें राजयोग के द्वारा बना रहे हैं। हमें अपने जीवन को श्रेष्ठ और उच्च बनाने के लिए सदा सुखी और शांत बनाने के लिए उस निराकार परमात्मा शिव माँ को याद अवश्य करना चाहिए।

केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने उद्गार में कहा कि भारत है मातृ प्रधान भूमि इसलिए वन्दे मातरम् कहा जाता है। इस संसार में पुरुष प्रधान होते भी गायन – विद्या की देवी सरस्वती, धन की देवी श्री लक्ष्मी एवं शक्ति की देवी शेर की सवारी श्री दुर्गा का किया जाता है। यह यादगार भी अतीत के परमात्मा पिता के दिव्य कर्तव्यों का प्रतीक है। भगवान के महावाक्य यदा यदाहि धर्मस्य … के अनुसार निराकार शिव परमात्मा अपने वादे के अनुसार इस धरा पर दिव्य अवतरण लेते हैं अर्थात् निराकार शिव परमात्मा साकार मनुज तन का आधार लेते हैं जो शिव मंदिरों में नन्दी का प्रतीक है जिसका कर्तव्य वाचक नाम प्रजापिता ब्रह्मा रखते हैं जिसे ही आदम, एडम, आदिनाथ, मनु, विश्वकर्मा आदि नामों से जाना जाता है। ब्रह्मा मुख द्वारा रचना रचते अर्थात् ब्रह्मा के बच्चे ब्राह्मण रचते हैं। रचयिता शिव परमात्मा हुए अतः ब्रह्मा मुख द्वारा रचने के कारण ही आध्या‍त्मिक भाषा में ब्रह्मा को माँ भी कहा जाता है। ब्रह्मा माँ द्वारा ही आदि रचना हुई इसी कारण भगवान के साथ आज तक गायन महिमा “त्वमेव माता, पिता, बन्धु सखा” आदि की जाती है। निराकार परमात्मा ब्रह्मा के मुख द्वारा विश्व के सभी जीवात्माओं को सहज राजयोग और ईश्वरीय ज्ञान द्वारा पतित ब्रहष्टाचारी दुःख की दुनिया को बदल श्रेष्ठाचारी, पावन दुनिया का पुनः स्थापना का कार्य कराते हैं।

इस आध्यात्मिक रहस्य को जानकर सभी आत्माएँ अपने अतीत के खोये निधि “पवित्रता, सुख, शांति को लेने के लिए अपना पुरूषार्थ करें। यही वह वक्त चल रहा है परंतु याद रहे “अभी नहीं तो कभी नहीं”। कार्यक्रम में बाल कलाकार के द्वारा माँ की महिमा थीम पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सभी के लिए ब्रह्मभोजन का भी आयोजन किया गया।

Deepak Verma

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