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शहीद स्थल, शहीद चौक में शहीद पांडेय गणपत राय का शहादत दिवस मनाया गया

रांची : महान क्रांतिवीर,1857 के जननायक शहीद पाण्डेय गणपत राय का शहादत दिवस 21 अप्रैल को शहीद स्थल,शहीद चौक रांची में आयोजित किया गया ।आज के दिन ही भारत की आजादी के लिए स्वतंत्रता की बलि बेदी में चढ़ने वाले वीर सपूत पांडेय गणपत राय को इस स्थल पर अत्याचारी ब्रिटिश सरकार के मुलाजिमों द्वारा ,रांची के शहीद स्थल में 21 अप्रैल 1858 को फांसी दी गयी।

शहीद पांडेय गणपत राय के द्वारा पूर्व का बिहार तथा वर्तमान झारखण्ड राज्य को अंग्रेजों की दास्तां से मुक्ति के लिए कई लड़ाइयां लड़ी गयी। उन्होंने गोरिला युद्ध भी देश के लिए किया गया जिससे इस क्षेत्र में अंग्रेजों की दास्ता से मुक्ति मिल सके ।


शहीद पाण्डेय गणपत राय स्मारक समिति रांची, शहीद स्मारक समिति रांची एवम जिला प्रशासन राँची,के संयुक्त तत्वावधान में प्रत्येक वर्ष शहीद पाण्डेय गणपत राय की शहादत दिवस समारोह मनायी जाती है।उनके ब्यक्तित्व एवम कृतित्व को याद कर यशगान किया जाता है,श्राद्धा सुमन अर्पित किया जाता है जिससे आने वाले पीढ़ी के द्वारा उनके त्याग को याद किया जा सके,इतिहास अमिट रहे,इस पवित्र धरती पर बाहरी आक्रमकारी कभी आंख उठा कर भी नहीं देखें। इस वर्ष 165 वीं शाहदत दिवस आयोजित किया जा रहा है।

श्राद्धा सुमन अर्पित करते हुए शहीद पांडेय गणपत राय की परपौत्री डॉ. बन्दना राय ने स्वागत भाषण देते हुए बतलाया कि लोहरदगा के लाल पांडेय गणपत राय ने क्रांतिकारी सेना की बागडोर संभाली थी
1857 में स्वतंत्रता आंदोलन की पहली लड़ाई के दौरान भी वीर सपूतों ने छोटानागपुर की धरती पर गोरों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था।
यह क्षेत्र आजादी के परवानों की भूमि रही है। रांची लोकसभा सांसद श्री संजय सेठ ने कहा कि देश में 1857 में स्वतंत्रता आंदोलन की पहली लड़ाई के दौरान भी लोहरदगा के वीर सपूतों ने छोटानागपुर की धरती पर गोरों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था। इन्ही के बलबुते आज हम अमनचैन के साथ जी रहे है।हमें देश के लिए जीना है, देश के लोए मरना है। तब जीवन सार्थक होगा।

डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि वीरों की इस धरती में सबका हार्दिक स्वागत है।प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत न केवल गुरिल्ला युद्ध में निपुण थे बल्कि अच्छे इंसान भी थे।लोहरदगा के लाल पांडेय गणपत राय ने क्रांतिकारी सेना की 1100 देश भक्त सिपाहियों की टुकड़ी तैयार की थी रामगढ़ के तात्कालिक शासक ने सहयोग नहीं किया जिससे वे पकड़े गए।राज्य सभा संसद डॉ महुआ मांझी ने कहा की 20 जुलाई 1857 को रामगढ़ बटालियन की आठवीं नेटिव इन्फैन्ट्री की दो टुकडिय़ों ने जमादार माधो सिंह, सूबेदार जय मंगल पांडेय एवं नादिर अली के नेतृत्व में बगावत कर दी थी। ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव तथा पांडेय गणपत राय के नेतृत्व में स्वतंत्रता सेनानियों ने डोरंडा स्थित अंग्रेजों के सभी मकानों को जला दिया, कचहरी जला दी गई, ट्रेजरी के खजाने लूट लिए गए और यूनियन जैक का झंडा उतार फेंका गया। दूसरे दिन रांची जेल का फाटक खोल दिया गया। लगभग दो माह तक ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने स्वयं शासन किया।


बाद में अंग्रेजी सरकार ने देशी गद्दारों की मदद से उन्हें गिरफ्तार किया और 16 अप्रैल 1858 को रांची के इसी शहीद स्थल के पास कदम वृक्ष पर उन्हें फांसी दे दी। उनके भारत माता की इस तपस्या तथा त्याग को आज के पीढ़ी को याद करना चाहिए।इसके अलावा भी हमारे झारखण्ड की धरती में अनेक वीर शाहिद हुए उन्हें भी हमें याद करनी चाहिए।श्री बिनय कुमार दीपू ने कहा कि पांडेय गणपत राय स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास में स्वर्णक्षार में लिखा जाएगा। नए पीढ़ी को भी यह याद करनी चाहिए।


महान स्वतंत्रता सेनानी पांडेय गणपत राय आज के पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं नई पीढ़ी के नॉनिहालों को उनके देश के प्रति त्याग,बलिदान को हमेशा याद करना चाहिए। डॉ राजेश कुमार लाल ने कहा कि इनका जीवनी को पाठ्य सामग्री में सम्मिलित करना चाहिए और इनका मातृभूमि के प्रति प्रेम त्याग और बलिदान के कारण राज्य के राजधानी में आदमकद प्रतिमा बने जिसे देखकर और पाठ्यसामग्री के माध्यम से ज्ञानार्जन कर नॉनिहाल उनके ब्यक्तित्व और त्याग को जान सके।। झारखंड अलग राज्य होने के बाद ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं कई जगह स्थापित की गई। जिनसे स्थानीय स्तर पर लोगों को अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी मिल रही है। डॉ सुभाष साहू ने कहा कि स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों में गणपत राय के शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरनेवालों का यही बाकी निशा होगा’। झारखंडी माटी के सपूत आहूति देने में सदैव आगे रहे। देश के लिए उत्सर्ग करनेवाले अनेकानेक दीप स्तंभ हैं, जिन्होंने 1857 में आजादी के जुनून के बीच एक हीरा शहीद पांडेय गणपत राय तूफान से कश्ती को निकालने के उपक्रम में शामिल थे।


‘वक्त जब गुलशन पे पड़ा तो खून हमने दिया
विधायक खिजरी श्री रामकुमार पहन ने कहा
ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेनेवाले भारत के अनेक शहीदों में छोटानागपुर वर्तमान झारखंड राज्य में एक नाम है ‘अमर शहीद पांडेय गणपत राय’ जी का। मातृभूमि, भारत मां को अंग्रेजों से मुक्त करने के प्रयास और भोली भाली मासूम जनता को अंग्रेजों के कहर से बचाने के जुर्म में वर्तमान शहीद स्थल (जिला स्कूल के निकट) एक कदम के पेड़ पर रांची में 21 अप्रैल सन् 1858 को फांसी पर अंग्रेजी हुकूमत ने चढ़ाया।


पांडेय गणपत राय का जन्म सन 1809 ई में लोहरदगा जिले के भौरो गांव में एक जमींदार परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम राम किसुन राय और माता का नाम सुमित्रा देवी था। इनके जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।डॉ सी.बी.सहाय ने कहा कि
21 अप्रैल 1858, छोटानागपुर के इतिहास का काला दिन था।


इनाम की लालच में भारत के कुछ लोग ऐसे थे जिन्होंने भारत माता के साथ गद्दारी कर इस संग्राम को दबाने में अंग्रेजों की मदद की। 21 अप्रैल 1858 को उन्हें रांची लाया गया। इसके बाद रांची के कमिश्नर डाल्टन ने उन्हें मौत की सजा सुना दी। इस शहादत दिवस के अवसर पर पद्मश्री मधु मंसूरी हँसमुख,सांसद रांची लोकसभा संजय सेठ,राज्यसभा सांसद डॉ महुआ,रांची विधायक सी.पी.सिंह ,आजसू नेता डॉ देवशरण भगत जी, मांझी,फनिद्र नाथ राय पंकज,डॉ संध्या रानी,डॉ संगीत सिन्हा, डॉ बन्दना राय,श्री नीरज राय,राजेश्वर नाथ आलोक, डॉ राजेश कुमार लाल,श्री राजकुमार साहू,नीरज सिन्हा,डॉ उमेश नंद तिवारी,श्री राजीव रंजन,सुरेश प्रसाद सिन्हा, बिनय सिन्हा दीपू, डॉ संजय कुमार षाड़ंगी,डॉ सुभाष साहु,डॉ सी.बी.सहाय,सूरज कुमार सिन्हा, निपु सिंह,वासिल कीड़ो,डॉ प्रह्लाद पांडेय,श्री प्रतुल शाहदेव,राजीव रंजन प्रसाद,डॉ स्वाति श्रीवास्तव,अंजू बरखा, सुबोध कुमार,ऋषिकेश लाल,डॉ पारमिता गुप्ता,डॉ अमिता कुमारी गुप्ता,स्याम कुमार,डॉ जिज्ञासा ओझा,बिंदु प्रसाद रिद्धिमा,रंजू लाल,संगीता लाल,डॉ अनिता,प्रो.राजेश कुजूर,डॉ समर सिंह,सुमित बरियार, पांडेय निरज राज सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे यह जानकारी शाहिद पांडेय गणपत राय स्मारक समिति के अध्यक्ष डॉ बन्दना राय ने दी।

Deepak Verma

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