बिहार के मलयपुर जमुई जिला से त्रिपुरारी पाण्डेय जो की राजनीती और शिक्षा में काफ़ी रुची रखते है. निचे दिए गए लेखन में उन्होने राजनीती और शिक्षा का ताल मेल कैसे किया है. देखिए

मनुष्य के जीवन में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि शिक्षा के बिना मानवजाति का जीवन अधूरा है ! शिक्षा मनुष्य के बुद्धि निर्माण के साथ -साथ चरित्र निर्माण एवं आत्मविश्वास पैदा करती है ! एक शिक्षित व्यक्ति किसी भी कार्य को पुरे आत्मविश्वास के साथ करते हैं ! शिक्षा जीवन के हरेक क्षेत्र यथा -राजनीतीक सामाजिक ,आर्थिक व अन्य क्षेत्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है ! इसी सन्दर्भ में राजनीती की बात की जाये तो ये कहा जा सकता है की राजनीती में शिक्षा अत्यंत आवश्यक है क्योंकि जो लोग राजनीती में होते हैं वो हमारे ही प्रतिनिधि होते हैं ! सत्ता में शामिल होकर हमारे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं !
हमारे द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि जितने योग्य एवं शिक्षित होंगे तभी तो वे देश का मार्गदर्शन कर पाएंगे ! एक शिक्षित नेता ही जनता व प्रदेश की समस्याओं को सही ढंग से समझ पाएंगे ! वो जनताओं की भावनाओं की कदर कर पाएंगे ! अक्सर ये देखा गया है की सत्ता में बैठे नेता न तो जनता की समस्याओं को समझते हैं और न ही उनकी समस्याओं को ससमय निदान करने की आवश्यकता को महसूस करते हैं ! साधारण शब्दों में यह कहा जा सकता है की यदि शिक्षा सबके लिए जरुरी है तो फिर राजनेताओं के लिए क्यों नहीं ?
इतने बड़े जिम्मेदराना पदों के लिए योग्यताओं की कोई अनिवार्यता नहीं रखना ये देश के संविधान के समक्ष सबसे बड़ा सवाल है ! हम उस देश में रहते हैं जहाँ एक शिक्षक बनने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है ! जैसे की अभ्यर्थी को पहले शिक्षक प्रशिक्षण में तालीम लेना पड़ता है !प्रशिक्षण की अनिवार्यता को पूरी करने के बाद उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना पड़ता है ! यदि छात्र पात्रता परीक्षा में अनुतीर्ण हो जाये तो उन्हें शिक्षक बनने के योग्य नहीं माना जाता है और उन्हें अयोग्य घोषित किया जाता है !





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