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उन्‍नत एवं वैज्ञानिक कृषि,उच्च मूल्य कृषि,पशुपालन,मत्स्य पालन व सिंचाई की क्रियान्वित योजनाओं के साथ कृषि के क्षेत्र में किये जा रहे हैं।

सतत विकास हेतु मॉडल के रूप में विकसित किये जाने की योजना

खूंटी:उपायुक्त शशि रंजन द्वारा कर्रा प्रखण्ड अंतर्गत समेकित आजीविका कृषि पार्क का अवलोकन किया गया। इस दौरान मुख्य रूप से कृषि पार्क को विकसित करने एवं कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के सबन्ध विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही उपायुक्त द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। मौके पर विशेष रूप से उप विकास आयुक्त, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, मत्स्य पदाधिकारी, DPM जे.एस. एल.पी.एस, बेटर वर्ल्ड फाउंडेशन के प्रतिनिधि व अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

उपायुक्त ने इन कार्यों को सफल रूप प्रदान करने के लिए सखी मण्डल की दीदियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों को समन्वय बनाकर कार्य करने की बात कही।

उपायुक्त ने विशेष रूप से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु किये जा रहे कार्यों का अवलोकन किया।

मधुमक्खी पालन बॉक्स की क्षमता 24 से बढ़ाकर 100 बॉक्स करने के निर्देश दिए। मौके पर उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट उत्पादन संयंत्र विकसित करने की आवश्यकता है। साथ ही नए बतख शेड बनाने के निर्देश दिए।

■ *कृषि एवं बागवानी*

इस कृषि पाठशाला के माध्यम से आजीविका के वैकल्पिक संसाधनों जैसे हॉर्टिकल्चर यानी उद्यान कृषि, फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की बागवानी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, उन्नत एवं वैज्ञानिक कृषि और सिंचाई से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इस परियोजना के माध्यम से कर्रा के आसपास के किसानों को कृषि, पशुपालन, बागवानी से जुड़े प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। इसमें विभिन्न प्रकार के फलों एवं फूलों का उत्पादन आधुनिक तरीके से किया जाता है। हॉर्टिकल्चर के तहत पॉमीलॉजी यानी फलदार वृक्ष, ओलोरीकल्चर यानी विभिन्न तरह की सब्जियों से सम्बंधित कार्य किए जा रहे हैं।

■ *स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट*

बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है। वहीं जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। फिलहाल प्रयोग के तौर पर एक एकड़ क्षेत्रफल में ड्रैगन फ्रूट की खेती की गई है। जिला प्रशासन की योजना व्यापक स्तर पर इसकी खेती करने की है।

■ *मशरूम उत्पादन*
इसके अलावे मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मशरूम इकाईयों की भी स्थापना की जा रही है। जिसका प्रशिक्षण भी किसानों को दिया जायेगा।

■ *पशुपालन*

मनरेगा की विभिन्न योजनाओं से शेड का निर्माण कर गाय पालन, बकरी पालन, मुर्गीपालन किया जा रहा है। वहीं मछली सह बत्तख पालन, केंचुआ खाद उत्पादन जैसी कृषि से जुड़ी जीविकोपार्जन की तमाम गतिविधियों को भी बल मिला है।

■ गोपालन-गिर गाय पालन

गिर गाय पालन के फायदे को देखते हुए किसानों में गोपालन को लेकर रुचि पैदा हुई है और डेयरी के क्षेत्र में नई क्रांति देखी जा रही है।
भैंस पालन-
वहीं भैंस की प्रजातियों को बढ़ावा देने के लिए 10 मुर्रा भैंस मंगवाया जा रहा है।

■ मुर्गी पालन
मुर्गी पालन में सोनाली नस्ल की मुर्गियों का पालन किया जा रहा है।

■ मधुमक्खी पालन

मधुमक्खी पालन आय वृद्धि का एक अच्छा माध्यम है। इसे देखते हुए यहां सबसे बेहतर कोटि के इटालियन मधुमक्खी पालन पर खासा जोर दिया जा रहा है।

■ *मछली सह बत्तख पालन*

एकीकृत मछली सह बत्तख पालन ने लोगों को रोजगार का नया विकल्प दिया है। इसमें तालाब में मछली पालन के साथ-साथ बत्तख पालन की समन्वित खेती की जा रही है, जो बेहद लाभप्रद व्यवसाय है।

■ *केंचुआ खाद*

फार्म अंतर्गत इकट्ठा किये गये सभी प्रकार के जैविक कचरे के उचित प्रबंधन एवं सही इस्तेमाल के उद्देश्य से केंचुआ खाद की 12 इकाईयों को बढ़ावा मिल रहा है। इस खाद का इस्तेमाल खेतों में मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। खाद के पिट से निकल रहे पानी को इकट्ठा कर वर्मी-वाश के काम में लाया जा रहा है।

■ *टपक सिंचाई सह मलचिंग*

कृषि के लिए तकनीकी उपकरण पर भी खासा जोर दिया जा रहा है। जिले में पानी की कमी के कारण रबी और जैद के मौसम में किसान खेती नहीं कर पाते हैं। टपक सिंचाई कम पानी की लागत में दोगुने उत्पाद का एक सशक्त जरिया है। सभी उच्च मूल्य कृषि और पौधों को टपक सिंचाई के माध्यम से मलचिंग कर लगाया जा रहा है। इसके जरिए 90 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, तो वहीं खाद-बीज की लागत भी 60 प्रतिशत तक कम आती है। टपक सिंचाई के लिए जमीन सिर्फ एक बार तैयार करनी होती है। इसलिए खेत तैयारी में भी 66 प्रतिशत की बचत संभव होती है।

■ *सोलर लिफ्ट सिंचाई*

इस इकाई के माध्यम से विभिन्न आउटलेट के जरिए फार्म के कोने-कोने तक पानी की सुविधा उपलब्ध होगी। पानी का मुख्य स्रोत फार्म में विकसित किये गये दो तालाब होंगे।

■ *पॉली नर्सरी हाउस*
मिट्टी रहित पौधों को तैयार करने एवं बीज से पौधे निकलने के लिए संतुलित वातावरण प्रदान करने के लिए पॉली नर्सरी हाउस की स्थापना।

सखी मंडलों के माध्यम से निर्मित/उत्पादित सामग्रियों की सोर्टिंग एवं ग्रेडिंग, मूल्यवर्धन, पैकेजिंग, विपणन आदि के लिए एक विशेष प्रोसेसिंग प्लांट अधिष्ठापन करने की योजना है। निर्मित/उत्पादित सभी सामग्रियों की गुणवत्ता एवं उपयुक्त प्रमाणीकरण सुनिश्चित करते हुए पलाश ब्रांड अंतर्गत बेचने की योजना है। साथ ही किसानों के लिए कृषि संबंधी कार्य को सरल व सुगम बनाने हेतु उन्हें उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जा रहे हैं एवं उनके लिए संसाधनों की उपलब्धता को सरल किया जा रहा है।

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