जहानाबाद:राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ‘शब्दाक्षर’ के जहानाबाद जिला इकाई की मासिक काव्यगोष्ठी राजेन्द्र जिला पुस्तकालय के सभागार में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई। काव्यगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शब्दाक्षर बिहार के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार मिश्र ‘पद्मनाभ’, बतौर विशिष्ट अतिथि शब्दाक्षर की राष्ट्रीय प्रवक्ता-सह-प्रसारण प्रभारी प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी, बतौर प्रधान अतिथि समाजसेवी संतोष श्रीवास्तव, जहानाबाद की पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष अनुराधा सिन्हा, साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी, सुधाकर राजेन्द्र, गणपति मिश्र व शिक्षाविद पी.के. मोहन की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण के साथ पुष्पगुच्छ व अंगवस्त्र प्रदान करके किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्दाक्षर जहानाबाद के जिला उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. उमाशंकर सुमन ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्ज्वलन तथा शब्दाक्षर जहानाबाद की जिला साहित्य मंत्री सावित्री सुमन द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने अपने उद्बोधन में शब्दाक्षर के साहित्यिक उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए शब्दाक्षर के संस्थापक-सह-राष्ट्रीय अध्यक्ष व कार्यक्रम के दिग्दर्शक श्री रवि प्रताप सिंह द्वारा प्रेषित शुभकामना संदेश “सदा शीश ऊँचा रखता है कर हिन्दी पर गर्व, नित्य मनाता है ‘शब्दाक्षर’ हिन्दी हित के पर्व” तथा शब्दाक्षर बिहार प्रदेश प्रभारी डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र की शुभकामना पंक्तियाँ, “सौरमास संक्रांति सदृश अपना शब्दाक्षर” पढ़ कर सुनायीं। उन्होंने कार्यक्रम के कुशल संयोजन हेतु श्रीमती सुमन एवं श्री मधुकर के अथक प्रयासों को सराहा तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सिंह सहित पूरे शब्दाक्षर परिवार के प्रति कृतज्ञता जतायी। वहीं प्रदेश अध्यक्ष श्री पद्मनाभ ने शब्दाक्षर को पूर्ण रूप से हिन्दी सेवी संस्था बतलाते हुए इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
काव्यगोष्ठी में आमंत्रित अतिथियों एवं रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ पढ़ीं। प्रो. डॉ. रश्मि की, “मर्त्य होते हैं कवि, लेकिन, अमर रहती सदा कविता। सत्य का दीप ले बढ़ती, निडर रहती सदा कविता। विचारों के समंदर, भावनाओं के सरोवर में। नहाकर के निखर जाती, मधुर रहती सदा कविता..” पंक्तियों पर खूब वाहवाहियाँ लगीं। प्रो. डॉ. उमाशंकर की कविता “नये गीत अब नहीं रचूंगा”, पी. के. मोहन की “नशा करो साहित्य का, सभी करेंगे प्यार, शब्दाक्षर परिवार को वंदन बारंबार”, सावित्री सुमन की ग़जल, “चलो मुसाफिर तुम दुनिया के मेले में, कोई तो मिल जाएगा साथी अकेले में” तथा महेश मधुकर की “एक जमीं, एक आसमां, एक सूरज, एक चाँद, अनेक सितारे, मस्ती में मतवाले, एक दूसरे के सहारे…” को श्रोताओं ने काफी पसंद किया। कवि चितरंजन चैनपुरा की, “डरे मोरा जियरा रे कुहू-कुहू ना”, युवा कवि मुकेश कुमार मिश्र की “सुहानी शाम के सूरज की तरह ढलते हैं… बुरी नज़र भी क्या खाक़, मेरा कुछ बिगाड़ेगी, माँ के हाथ से टीका लगाके चलते हैं..”, नंदन मिश्र की “हर रिश्ता अटूट हो, बंधन अटूट हो. “, कवयित्री रूबी कुमारी की “माँ वंदनीय हो तुम, आदरणीय हो तुम”, स्मृति अनुरागिनी की “नारी तुम सम्मान हो, देश का अभिमान हो..” तथा पंकज कुमार अमन की नजारे बहुत हैं मगर नज़र तुम्हीं पे रखता हूँ..”, सुनकर श्रोतागण झूम उठे। शब्दाक्षर के केन्द्रीय पेज से लाइव प्रसारित होने वाली इस भव्य काव्यगोष्ठी का संचालन शब्दाक्षर जहानाबाद के जिला सचिव महेश कुमार मधुकर तथा धन्यवाद ज्ञापन जिला अध्यक्ष ललित शंकर ने किया। कार्यक्रम में अश्विनी कुमार, डॉ. अनवर, धर्मशीला कुमारी, अनीला सिन्हा, बी. के. सुमन, बी. के. श्वेता, रंजीत कुमार, रूबी कुमारी, रणजीत कुमार, प्रमोद कुमार की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।





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