राँची : वैश्य समाज की जमीन लूट एवं उपायुक्त द्वारा बदमाश और भू-माफिया कहे जाने के खिलाफ आज 3 अगस्त को झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा द्वारा राजभवन के समक्ष एकदिवसीय ‘त्राहिमाम महाधरना’ का आयोजन किया गया। इस महाधरना में वैश्य मोर्चा के केंद्रीय पदाधिकारियों, सदस्यों सहित मूल रैयत भी शामिल हुए। महाधरना की अध्यक्षता वैश्य मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु एवं संचालन प्रधान महासचिव बिरेन्द्र कुमार व केंद्रीय महासचिव इंदूभूषण गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया। महाधरना कार्यक्रम के पश्यचात वैश्य मोर्चा की ओर से महामहिम राज्यपाल को स्मार-पत्र भी सौंपा गया, जिसकी प्रतिलिपि राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित साह को भी भेजा गया है।
राज्यपाल को सौंपे गए स्मार-पत्र में कहा गया कि है कि वैश्य मोर्चा की ओर से इस बात को लगातार उठाया जाता रहा है कि राज्य में इन दिनों शासन-प्रशासन वैश्यों को बेवजह निशाना बना रही है। शोषण-दमन और उत्पीड़न का शिकार वैश्य समाज को सोच-समझ कर बनाया जा रहा है। और आवाज उठाने, प्रतिकार करने पर केस में फंसाने की धमकी दी जा रही है या पुलिस बल का इस्तेमाल कर आवाज को दबा दिया जा रहा है। निजी और पुस्तैनी संपति छीनवा दी जा रही है।
इसका ताजा उदाहरण रांची जिला के हेहल अंचल अन्तर्गत, थाना-सुखदेव नगर के बजरा ग्राम की कुल रकबा- 7.16 एकड़ जमीन से संबंधित मामले को देख कर समझा जा सकता है। उपरोक्त भूमि (थाना नं.140, खाता नं.140, प्लॉट नं. 1323, 1324, 1333, 1334, 1338 एवं 1337/1349) सर्वे खतियान में सीताराम साहु वगैरह के नाम से अंकित है, जिसके वंशज हाल के दिनों तक खेती-बारी करते रहे हैं और इनका दखल कब्जा भी था। लेकिन पिछले कुछ माह में फर्जी कागजों और दावेदारों का ऐसा दौर चला कि रांची के उपायुक्त महोदय के आदेशानुसार दबंग, फर्जी और भू-माफिया लोग उक्त जमीन का मालिक बन बैठे हैं तथा मूल खतियानी रैयत ‘बदमाश’ और ‘भू-माफिया’ कहलाने लगे।
स्मार पत्र में कहा गया है कि रांची के उपायुक्त ने अपने एक आदेश-पत्र (ज्ञापांक-2199/गो, 25 जून 2021 में जिन मूल खतियानी रैयतों को ‘बदमाश’ और ‘भू-माफिया’ की संज्ञा दी है, सभी जानते हैं वे संभ्रांत और प्रतिष्ठित परिवार के हैं। यह परिवार वैश्य जाति-समाज से आते हैं और सभी लोग खेती-बारी, व्यवसाय, नौकरीपेशा से जुड़े हैं। यहां तक कि इस परिवार के स्व. नारायण साहु एचईसी, रांची में अधिकारी थे और साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय एथलीट भी थे, जिन्होंने देश के लिए कई पदक हाशिल किया था। वैश्य समाज ने उन्हें 2014 में ‘झारखंड वैश्य रत्न’ की उपाधि से सम्मानित भी किया था।
इस परिवार में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की योग शिक्षा से जुड़ी अर्चना कुमारी हैं, जबकि झारखंड अलग राज्य के आन्दोलनकारी श्री अश्विनी कुमार साहु भी हैं, जो अब बड़े स्तर पर अपना व्यवसाय करते हैं।
ऐसे लोगों के परिवार को रांची के उपायुक्त द्वारा ‘बदमाश’ और ‘भू-माफिया’ बताना, पूरे वैश्य समाज का अपमान है। उस परिवार को डरा कर अपनी जमीन पर दावेदारी छुड़वाने की सोची-समझी साजिश है, जिससे पूरा वैश्य समाज काफी आहत है।
वैश्य मोर्चा ने लिखा है कि राज्य और देश में लोकतंत्र है, और लोकतंत्र में लाठी-गोली का डर दिखा कर जनता को डराया नहीं जा सकता है, इसलिए खतियानी रैयतों को भी अपनी माटी, अपनी जमीन बचाने के लिए लड़ने से रोका नहीं जा सकता है। लेकिन जिला प्रशासन यही काम कर रही है, जो काफी चिंता का भी विषय है।
झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा ने 20 जुलाई 2021 को आप महोदय सहित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता एवं मुख्य सचिव (झारखंड) को ज्ञापन सौंप कर सारी स्थिति से अवगत करा दिया था और इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए मूल रैयतों को न्याय दिलाने का आग्रह किया गया था। लेकिन अब भी उक्त जमीन पर गलत लोगों द्वारा अवैध निर्माण कार्य जारी है और मूल खतियानी रैयतों को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। वे लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।
स्मार पत्र में यह भी कहा गया है कि चूंकि यह मामला वैश्य समाज के रैयतों के जमीन से जुड़ा है, उनकी रोजी-रोटी, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है तो आप महोदय से उम्मीद है कि जल्द ही सकारात्मक पहल करेंगे और रांची के उपायुक्त की गलत मंशा और कार्य प्रणाली पर रोक लगाने का आदेश देगें तथा रैयतों को जमीन वापस दिलवाने में सकारात्मक पहल करेंगे।
इस महाधरना कार्यक्रम मुख्य रूप से कार्यकारी अध्यक्ष हीरानाथ साहु, वरीय उपाध्यक्ष संजीव चौधरी, उप-प्रधान महासचिव उपेन्द्र प्रसाद साहु, केंद्रीय महासचिव रामकृष्ण प्रसाद, महासचिव कपिल प्रसाद साहु, केंद्रीय सचिव गुड्डू साहा, लखन अग्रवाल, केंद्रीय सदस्य हृदय प्रसाद साहु, मीडिया प्रभारी राहुल कुमार साहु, जिला अध्यक्ष रोहित कुमार साहु, महिला मोर्चा की महासचिव रेनू देवी, युवा मोर्चा के अध्यक्ष हलधर साहु, रैयत अश्विनी कुमार साहु, दिनेश्वर साहु, भरत प्रसाद गुप्ता, उर्मिला देवी, कुसुम देवी, गायत्री देवी, मालती देवी आदि उपस्थित थीं।





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