देश के सभी राज्यों की महिला चिकित्सकों को महिला चिकित्सक संघ के द्वारा झारखंड के इस अभियान से जोड़ा गया ताकि सभी राज्यों में इस अभियान को अपनाया जा सके
यूनिसेफ के द्वारा 30 हजार जल सहियाओं को इस कार्यक्रम में जोड़ा गया
राँची : कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बढ़ते संक्रमण को मद्देनज़र रखते हुए वीमेन डॉक्टर्स विंग ने अाईएमए झारखंड, स्वच्छ भारत मिशन एवं यूनिसेफ के द्वारा एक संयुक्त अॉनलाइन कोविड 19 के संदर्भ में प्रशिक्षण व जागरुकता अभियान का संचालन किया गया. यह पहल गाँव के लोगों को कोविड अनुरुप व्यवहार एवं टीकाकरण के बारे में जो भ्रान्तियां है, विशेष कर प्रजनन स्वास्थ्य पर इसके असर को लेकर जो भ्रांतियां है उसे दूर करने के लिए की गई. कार्यक्रम में देश के 30 हजार जल सहियाओं को अाईएमए की विभिन्न महिला शाखाओं द्वारा जोड़ा गया था. कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता अाईएमए राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. जया लाल ने देश के सभी राज्यों की विमेन डॉक्टर्स विंग की अध्यक्षाओं को झारखंड के इस अभियान का अनुसरण अपने – अपने राज्यों में करने के लिए प्रेरित किया ताकि 18 से 45 वर्ष के लोगों के बीच में टीकाकरण से जुड़ी मिथ्या धारणाओं की वजह से उसकी गति में व्यवधान न अाए. विशेषकर प्रजनन स्वास्थ्य पर इसके असर को लेकर जो भ्रांतियां हैं उसे दूर की जा सकेे.
महिलाओं के प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य पर टीकाकरण के सुरक्षित प्रभाव से अवगत कराया गया.
महिला चिकित्सक संघ झारखंड की अध्यक्षता डॉ. भारती कश्यप एवं स्वच्छ भारत मिशन झारखंड की निर्देशिका नैंसी सहाय ने समस्त कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन किया.
मुख्य वक्ता डॉ. रवि कश्यप,डॉ.भारती कश्यप, एवं डॉ. रुपिंदर सेखों ने वेबिनार के माध्यम से कोरोना टीकाकरण के प्रजनन स्वास्थ्य पर सुरक्षित प्रभाव कोविड 19 अनुसार व्यवहार, नेत्रदान जागरुकता, महिलाओं के जन्नाग संबंधी कैंसर से बचाव के तरीके से अवगत कराया.
इलेनोईस विश्वविद्यालय अमरिका के प्रोफेसर डॉ. रवि कश्यप ने कहा कि कोविड अनुरुप व्यवहार एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर टीके के सुरक्षित प्रभाव को बताया :-
कोरोना टीका गर्भावस्था में यह टीका दिया जा सकता है.
कोरोना टीका दूध पिला रही माता को दिया जा सकता है.
यह संक्रमण एक बार होने के उपरांत पुन: भी हो सकता है इसलिए सुरक्षात्मक तरीकों को अपनाना न छोड़ें.
छोटे बच्चों को भी यह हो सकता है इसलिए बच्चों के लिए भी सुरक्षात्मक तरीका को अपनाएँ.
राजीव गाँधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिचर्स सेंटर , नई दिल्ली की निर्देशक डॉ. रुपिंदर सेखों ने सर्वाइकल कैंसर एवं स्तन कैंसर से बचाव के लिए शुरुअाती लक्षणों जैसे शारीरिक संबंध बनाते वक्त रक्त अाना या तेज दर्द होना, वेजाइना से अक्सर व्हाइट बदबूदार डिस्चार्ज होना, पीरियड के वक्त काफी अधिक दर्द हो, पेशाब की थैली में दर्द ,पेट के निचले भाग में दर्द, अनियमित मासिक स्त्राव अादि की पहचान के बारे में सभी सहियाओं को बताया क्योंकि शुरुअाती दौर में नहीं पहचान होने की वजह से ही हमारे देश में कई बार महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर एवं सर्वाइकल कैंसर से बचाया नहीं जा पाता है.
डॉ. भारती कश्यप ने नेत्रदान के विषय में एवं प्रशांता दास , यूनिसेफ के झारखंड प्रमुख ने हाथ धुलाई के सही तरीकों की जाऩकारी दी.
इस अभियान को अागे भी ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा ताकि क्षेत्रों में संक्रमण खतरनाक दौर में न पहुँचे.
इस अॉनलाइन वेबिनार के दौरान इन सहियाओं ने अपने – अपने प्रश्न पूछे –
बोकारो से सुनीता देवी,गोड्डा से सोनी देवी,राँची से रिंकी केशरी,गढ़वा से अर्यमा कुमारी और गिरिडीह से सुरंती देवी.




